समग्र उपचार पद्धति में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला सम्मान
नई दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रख्यात चिकित्सक, विद्वान और राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान-नीएसआर लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेत को पारंपरिक चिकित्सा एवं समग्र स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा प्रतिष्ठित वेलनेस विजिनेरी मददगार से सम्मानित किया गया है। विश्वविद्यालय में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय वेलनेस सम्मेलन के दौरान निष्पक्ष यह पुरस्कार प्रदान किया गया। तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने किया। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित प्रशिक्षु, शिक्षा शास्त्री और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के अग्रणी ने भाग लिया।
42 हेल्थ एक्सपोर्ट सम्मानित
सम्मेलन के दौरान देशभर के कुल 42 प्रसिद्ध स्वास्थ्य कर्मियों को उनके क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. पद्मा गुरमेत ने विशिष्ट वक्ता के रूप में हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए सोवा-रिग्पा के महत्वपूर्ण विषय पर तकनीकी व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने में प्राचीन हिमालयी चिकित्सा पद्धति सोवा-रिग्पा की प्रासंगिकता और उत्कृष्ठता का उल्लेख किया। इस सम्मेलन से सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति और इसके समृद्ध पारंपरिक ज्ञान को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच मिला। इसमें भाग लेने वालों ने सोवा-रिग्पा के मूलभूत सिद्धांतों, संरचनात्मक एवं चिकित्सा पद्धतियों को समझने में गहरी रुचि दिखाई, जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति बढ़ती रुचि तथा समग्र स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को परिलक्षित करता है। डॉ. पद्मा गुरमेत को दिया गया यह सम्मान सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार एवं इसे व्यापक पहचान दिलाने में उनके योगदान को आयताकार करता है।
