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ब्रिटिश संसद में मना विश्व होम्योपैथी दिवस

ब्रिटिश संसद में मना विश्व होम्योपैथी दिवस

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। लंदन कॉलेज ऑफ़ होम्योपैथी (LCH UK) ने होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (HMAI) के सहयोग से लंदन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ मनाया। इस दिन होम्योपैथी  (Homeopathy) के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की 271वीं जयंती थी। यह भव्य कार्यक्रम ब्रिटिश संसद के ‘हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स’ स्थित ऐतिहासिक और शाही माहौल वाले ‘चोलमोंडले रूम’ में आयोजित किया गया, जिसके बाद लंदन के ‘होटल रैडिसन’ में शैक्षणिक सत्र हुए। इस सम्मेलन में दुनिया भर से जाने-माने होम्योपैथ, शोधकर्ता और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर एक मंच पर एकत्रित हुए, जिसने होम्योपैथिक शोध और अभ्यास के क्षेत्र में बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को रेखांकित किया।

होम्योपैथी: कल्याण के लिए समर्पित

उद्घाटन समारोह में लंदन के हौंसलो की मेयर एमी क्रॉफ्ट, वेस्ट लंदन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री क्रिस डर्किन और ग्रेटर लंदन के डिप्टी लेफ्टिनेंट श्री रणदीप सिंह लाल ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। एक तरह से, श्री लाल यूनाइटेड किंगडम के सम्राट, महामहिम किंग चार्ल्स का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में होम्योपैथी के योगदान को सराहा और आधुनिक समय में इंटीग्रेटिव मेडिसिन (एकीकृत चिकित्सा) के महत्व पर ज़ोर दिया। HMAI के महासचिव डॉ. ए. के. गुप्ता ने कहा कि ‘होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ होम्योपैथी के उत्थान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, ताकि इसकी प्रभावशीलता, गैर-विषाक्त प्रकृति और आर्थिक रूप से किफायती होने के कारण इसे उपचार के पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा सके। साथ ही, यह संस्था बड़े पैमाने पर होम्योपैथ्स के कल्याण के लिए भी समर्पित है। “होम्योपैथी के साथ तालमेल: सीमाओं से परे उपचार” इस सम्मेलन का मुख्य विषय था।

होम्योपैथी: 6 सत्र आयोजित

इस वैज्ञानिक सम्मेलन में ऑन्कोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और ऑर्गेनॉन विषयों पर 6 विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। कुल 24 प्रतिष्ठित वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने, जो यूनाइटेड किंगडम, तुर्की, भारत, पोलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, अज़रबैजान, अरूबा, नीदरलैंड, कजाकिस्तान और UAE जैसे विभिन्न देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, अपने वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने अपने नवीनतम शोध निष्कर्ष, नैदानिक अनुभव और होम्योपैथिक उपचार पद्धतियों में हुई प्रगति को प्रस्तुत किया। सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण उन शोध पत्रों की प्रस्तुति थी, जिनमें गंभीर और दुर्लभ चिकित्सा स्थितियों पर चर्चा की गई थी। इनमें मोटर न्यूरॉन रोग, कैंसर, ऑस्टियोमाइलाइटिस, एलोपेसिया, सोरायटिक गठिया, कुछ तथाकथित सर्जिकल स्थितियां, ऑटिज्म, रूमेटॉइड गठिया, बेल्स पाल्सी, इस्केमिक हृदय रोग आदि पर प्रस्तुत शोध पत्रों ने होम्योपैथिक प्रबंधन दृष्टिकोणों के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की वहीं डॉ. संकेत गुप्ता ने ‘एपिडर्मोलिसिस बुलोसा’ पर एक गहन अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसमें इसके आशाजनक परिणाम और चिकित्सीय दृष्टिकोणों को दर्शाया गया था। डॉ. सेलिना हैदरली, डॉ. मिशेल मैंडर्स, डॉ. ज़हरा सवरोन, डॉ. इलियास अखुंदज़ादा, डॉ. फारोख मास्टर, डॉ. ए. के. गुप्ता, डॉ. गिरीश गुप्ता, डॉ. पात्रा, डॉ. विकास सिंघल, डॉ. रवि सिंह, डॉ. बृज मोहन, डॉ. तनवीर हुसैन, डॉ. विजेंद्र सिंह, डॉ. संकेत गुप्ता, डॉ. मिन्नी मेहता, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. शीतल, डॉ. सपना, डॉ. कमल जिंदल, डॉ. अन्वेषा, डॉ. नैना पटेल, डॉ. मुकेश मुसाले, डॉ. समीर चोकर और डॉ. इंदु ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

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