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जनऔषधि परियोजना का आत्मघाती फैसला, देश भर के अधिकारियों में फैला है आक्रोश

नई दिल्ली/ 18.07.2018
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अधिकारियों में एक फरमान ने आक्रोश पैदा कर दिया है। 11 जुलाई को बीपीपीआई के सीइओ सचिन कुमार सिंह ने एक ऑफिस ऑर्डर निकाला है, जिसमें पीएमबीजेपी में काम कर रहे अधिकारियों के पदनाम बदलने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के आते ही पीएमबीजेपी के मार्केटिंग से जुड़े अधिकारियों में नाराजगी फैल गयी है।
P11 जुलाई को देश भर के सभी मार्केटिंग अधिकारियों को एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि मार्केटिंग ऑफिसर को मेडिकल रिप्रेजेंटिव, सीनियर मार्केटिंग ऑफिर को सीनियर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एवं डिप्यूटी मार्केटिंग मैनेजर को एरिया मैनेजर के रूप में जाना जायेगा। सूत्रो का कहना है कि यह पदनाम सभी अधिकारियों को अपना डिमोशन जैसा लग रहा है। वैसे भी जिन पदनामों को उपयोग करने को आदेश दिया गया है इन्हीं नामों से हजारों कंपनियां अपना व्यापार चला रही हैं। इस बावत स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि पदनाम बदलने के लिए जिसने भी सलाह दिया होगा निश्चित रूप से वह पीएमबीजेपी का हितैशी नहीं है। जिन पदनामों के साथ पीएमबीजेपी के अधिकारियों को काम करने को कहा गया है वे पदनाम बाजार में पहले ही बहुत नकारात्मक प्रभाव छोड़ चुके हैं। श्री आशुतोष ने सरकार से मांग की कि पीएमबीजेपी के अधिकारियों के मान-सम्मान का ध्यान रखते हुए इस परियोजना को बाजार के प्रभाव से मुक्त रखने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि बाजार की ताकतें पीएमबीजेपी परियोजना को कमजोर करना चाहती हैं, इस ओर सरकार को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। और अविलंब 11 जुलाई को जारी पत्रांक-BPPI/04/OFFICEORDER/2018 को वापस लिया जाए।
सूत्रो का कहना है कि अगर पीएमबीजेपी के कंपीटेंस अधिकारी इसी तरह फरमान जारी करते रहें तो कई मार्केटिंग के कई अधिकारी जॉब छोड़ भी सकते हैं।
पीएमबीजेपी के अधिकारियों से इस बावत बात करने की कोशिश की गई लेकिन फोन नहीं उठा।

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