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Order : रक्त जरूरतमंदों के लिए, बेच नहीं सकते

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आम तौर पर अस्पताल में किसी मरीज को जब ब्लड की फौरन जरूरत होती है तो ब्लड बैंक वाले इसका फायदा उठाते हुए तीमारदार से अधिक पैसे लेते हैं। अगर ब्लड बैंक से नहीं मिला तो पेशेवर डोनर मनमानी कीमत वसूलते हैं। अब सरकार ने ब्लड बेचने पर रोक लगा दी है। केवल प्रोसेसिंग चार्ज लगेगा।

राज्यों को भेजा गया निर्देश

आदेश के अनुसार ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने ब्लड यूनिट पर सभी तरह के चार्ज को हटा दिया है। ब्लड बैंक सिर्फ सप्लाई और प्रोसेसिंग चार्ज ले सकते हैं। DCGI ने राज्यों को लिखा है कि खून बेचने के लिए नहीं है, यह सिर्फ देने के लिए है और ब्लड बैंक सिर्फ प्रोसेसिंग फीस चार्ज कर सकते हैं। उसने ड्रग कंट्रोलर्स से कहा है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले सभी ब्लड बैंकों को संशोधित दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश दें। .

प्रोसेस का काम होता है खर्चीला

प्रक्रिया के मुताबिक जब कोई व्यक्ति खून दान करता है तो उसे सीधे मरीज को नहीं चढ़ाया जाता है। पहले इस खून को संशोधित किया जाता है। इसमें रेड सेल, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा होता है। खून को चढ़ाने लायक बनाने की पूरी प्रक्रिया को ब्लड प्रोसेसिंग कहा जाता है और इसको करने में खर्च करना पड़ता है। इस खर्च की एक सीमा तय करने के लिए केंद्र ने 2022 में आदेश दिया था कि निजी ब्लड बैंक पूरे ब्लड प्रोसेसिंग के लिए 1550 रुपए से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकते हैं।

मरीज को इतना ही देना होगा

तब सरकार ने प्राइवेड ब्लड बैंकों के लिए पैक्ड रेड सेल्स, फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा और प्लेटलेट्स कॉन्संट्रेट के लिए भी प्रोसेसिंग फीस तय की थी। ब्लड बैंक पैक्ड रेड सेल्स की प्रोसेसिंग फीस 1550, फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा की प्रोसेसिंग फीस 400 और प्लेटलेट्स कॉन्संट्रेट के लिए प्रोसेसिंग फीस 400 रुपए ले सकते हैं जबकि सरकारी ब्लड बैंक में प्रोसेसिंग फीस 1100 रुपए तय की गई है।

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