मेडिकल कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और MBBS सीटों में बड़े विस्तार की कहानी
धीप्रज्ञ द्विवेदी
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, लेकिन इनमें मेडिकल शिक्षा का विस्तार विशेष रूप से उल्लेखनीय है। डॉक्टरों की उपलब्धता किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है और इसके लिए पर्याप्त संख्या में मेडिकल कॉलेज तथा मेडिकल सीटें होना आवश्यक है। इसी दृष्टि से देखें तो 2014 के बाद भारत में मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बड़ा विस्तार हुआ है। इस बदलाव को समझने के लिए केवल 2014 और 2026 के आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है। अगर 2004, 2014 और 2026 को एक साथ रखा जाए तो भारत में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की लंबी यात्रा और उसकी गति दोनों अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं। 2004 के आसपास देश में लगभग 221 मेडिकल कॉलेज और करीब 24 हजार MBBS सीटें थीं। 2014 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 387 और MBBS सीटें 51,348 हो गईं। इसके बाद विस्तार की गति और तेज हुई। अगस्त 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 846 मेडिकल कॉलेज और 1,39,864 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। इसका अर्थ है कि 2014 के बाद केवल मेडिकल कॉलेजों की संख्या ही दोगुने से अधिक नहीं हुई, बल्कि MBBS में प्रवेश की क्षमता लगभग 2.7 गुना हो गई।
2004 से 2026: पूरी तस्वीर एक नजर में
2004 के आसपास 221 मेडिकल कॉलेज, 24,005 MBBS सीटें, सरकारी मेडिकल कॉलेज 121, सरकारी मेडिकल सीटें 13,320
2014 के आसपास 387 मेडिकल कॉलेज, 51,348 MBBS सीटें, सरकारी मेडिकल कॉलेज 181, सरकारी मेडिकल सीटें 24,774
2023-24 —56,300 MBBS सीटें
2026—846 मेडिकल कॉलेज, MBBS सीटें 1,39,864, सरकारी मेडिकल कॉलेज 464, सरकारी मेडिकल सीटें 66,221
2004 के आंकड़े ऐतिहासिक स्रोत से लिए गए हैं और बाद की NMC/स्वास्थ्य मंत्रालय की श्रृंखला से उनकी methodology पूरी तरह समान नहीं है। इसलिए उन्हें दीर्घकालीन संदर्भ के रूप में देखना उचित है। 2026 की स्थिति में स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 464 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 66,221 MBBS सीटें, जबकि 382 निजी मेडिकल कॉलेजों में 73,643 MBBS सीटें हैं। इस प्रकार कुल 846 मेडिकल कॉलेजों में 1,39,864 MBBS सीटें उपलब्ध हैं।
2014 के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या हुई दूनी से अधिक
2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे। 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 846 हो गई है। अर्थात: 387 → 846 यानी 459 मेडिकल कॉलेजों की शुद्ध वृद्धि और लगभग 118.6 प्रतिशत का विस्तार। यह बदलाव केवल बड़े महानगरों में नए कॉलेज खोलने तक सीमित नहीं रहा। जिला अस्पतालों और रेफरल अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में अपग्रेड करने की योजना के माध्यम से देश के उन क्षेत्रों में भी मेडिकल शिक्षा का विस्तार किया गया जहां पहले मेडिकल कॉलेजों की उपलब्धता सीमित थी।
MBBS सीटों में 172 फीसद से अधिक वृद्धि
मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ MBBS सीटों में इससे भी तेज वृद्धि हुई। 2014 से पहले 51,348 MBBS सीटें तो 2026 में 1,39,864 MBBS सीटें यानी 88,516 अतिरिक्त MBBS सीटें और लगभग 172.4 प्रतिशत वृद्धि। दूसरे शब्दों में, आज देश में एक वर्ष में MBBS में प्रवेश लेने की क्षमता 2014 के मुकाबले लगभग 2.72 गुना हो गई है। यह विस्तार मेडिकल शिक्षा की राष्ट्रीय क्षमता में एक बड़ा परिवर्तन है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों का भी बड़ा विस्तार
इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकारी मेडिकल कॉलेजों का विस्तार है। 2014 के आसपास देश में 181 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे। 2026 में यह संख्या बढ़कर 464 हो गई है। अर्थात लगभग 181 → 464 यानी 283 सरकारी मेडिकल कॉलेजों की वृद्धि। यह वृद्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की लागत आम तौर पर निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम होती है। इसलिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सीटों का विस्तार उन विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है जिनके परिवार निजी मेडिकल शिक्षा का बहुत अधिक खर्च वहन नहीं कर सकते।
सरकारी MBBS सीटें भी लगातार बढ़ीं
सरकारी क्षेत्र में केवल कॉलेजों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि सीटों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ। 2014 के आसपास सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 24,774 MBBS सीटें थीं। 2022 तक यह संख्या बढ़कर 51,712 हो गई और 2023-24 में 56,300 तक पहुंच गई। 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब 66,221 MBBS सीटें हैं।अर्थात 2014 के लगभग 24,774 सरकारी MBBS सीटों से 2026 में 66,221 सीटों तक पहुंचना सरकारी चिकित्सा शिक्षा क्षमता में लगभग 41,447 सीटों का विस्तार दर्शाता है।
आज सरकारी और निजी क्षेत्र की स्थिति
2026 की उपलब्ध स्थिति को सरल रूप में देखें:
श्रेणी मेडिकल कॉलेज MBBS सीटें
सरकारी 464 66,221
निजी 382 73,643
कुल 846 1,39,864
सरकारी कॉलेज कुल मेडिकल कॉलेजों का लगभग 55 प्रतिशत हैं और सरकारी MBBS सीटें कुल सीटों का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि देश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार केवल निजी क्षेत्र के माध्यम से नहीं हुआ है। सरकारी क्षेत्र ने भी अपनी क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि की है।
157 नए मेडिकल कॉलेजों की पहल
मेडिकल शिक्षा के विस्तार में एक महत्वपूर्ण योजना जिला अस्पतालों और रेफरल अस्पतालों को अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज बनाने की रही है। इस योजना के तहत 157 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं। इनका उद्देश्य विशेष रूप से उन क्षेत्रों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना है जहां पहले ऐसी संस्थागत क्षमता कम थी। इसका प्रभाव केवल मेडिकल छात्रों तक सीमित नहीं है। एक मेडिकल कॉलेज के साथ बड़ा शिक्षण अस्पताल विकसित होता है। वहां MBBS विद्यार्थियों के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, प्रयोगशालाएं और विभिन्न Diagnostic सुविधाएं भी विकसित होती हैं। इसलिए किसी जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का अर्थ केवल नई MBBS सीटें पैदा करना नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का अवसर भी है।
मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटें बढ़ीं
नए मेडिकल कॉलेज खोलने के साथ पुराने सरकारी मेडिकल कॉलेजों की क्षमता भी बढ़ाई गई। सरकार के अनुसार 83 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 4,977 अतिरिक्त MBBS सीटों के लिए सहायता दी गई है। इसके लिए ₹5,972.20 करोड़ की स्वीकृत लागत बताई गई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए केवल नए संस्थान बनाने की नीति नहीं अपनाई गई, बल्कि मौजूदा संस्थानों के infrastructure को मजबूत करके वहां भी ज्यादा विद्यार्थियों को पढ़ाने की क्षमता विकसित की गई।
आगे 5,023 और सरकारी MBBS सीटें
सरकारी मेडिकल शिक्षा के विस्तार की प्रक्रिया अभी जारी है। मौजूदा राज्य सरकार और केंद्र सरकार कके मेडिकल कॉलेज तथा सरकारी अस्पतालों को अपग्रेड करके 5,023 अतिरिक्त MBBS सीटें विकसित करने की योजना स्वीकृत की गई है, जिसकी समयसीमा 2028-29 तक है। इससे आने वाले वर्षों में सरकारी मेडिकल शिक्षा की क्षमता और बढ़ने की संभावना है।
छह वर्षों में 48,563 MBBS सीटें
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2020-21 से 2025-26 के बीच देश में 48,563 MBBS सीटें बढ़ाई गईं। इस अवधि में:
शैक्षणिक वर्ष MBBS सीटों में वृद्धि
2020- 21 2,963
2021- 22 8,790
2022- 23 7,398
2023- 24 9,652
2024- 25 8,641
2025- 26 11,119
कुल 48,563
2025-26 में अकेले 11,119 नई MBBS सीटें जोड़ी गईं। यह बताता है कि हाल के वर्षों में मेडिकल सीटों के विस्तार की गति लगातार बनी रही।
43 नए मेडिकल कॉलेज भी जुड़े
2025-26 में भी मेडिकल शिक्षा का विस्तार जारी रहा। सरकार के अनुसार इस शैक्षण्कि सत्र में 43 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए। इसी अवधि में 11,682 MBBS और 8,967 PG सीटों को मंजूरी दी गई। इसलिए मेडिकल शिक्षा का विस्तार 2014-2024 तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके बाद भी नए संस्थान और नई सीटें जोड़ी जाती रही हैं।
AIIMS नेटवर्क का विस्तार
सरकारी मेडिकल शिक्षा के विस्तार में AIIMS नेटवर्क की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। सरकार के अनुसार 22 नए AIIMS स्वीकृत किए गए हैं और इनमें से 19 में यूजी शुरू हो चुके हैं। AIIMS का महत्व केवल MBBS शिक्षा तक सीमित नहीं है। ये संस्थान पीजी और Super-speciality education, Advanced healthcare और Medical research के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। इसलिए AIIMS के विस्तार को देश में चिकित्सा शिक्षा और Tertiary healthcare capacity के व्यापक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है।
PG सीटों में भी बड़ा विस्तार
मेडिकल शिक्षा का अर्थ केवल MBBS सीटें नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने के लिए पीजी मेडिकल शिक्षा की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 2014 से पहले देश में लगभग 31,185 PG मेडिकल सीटें थीं। 2026 में यह संख्या बढ़कर 86,360 हो गई है। अर्थात लगभग 55 हजार अतिरिक्त PG सीटें जुड़ी हैं और वृद्धि लगभग 177 प्रतिशत रही है। इसका अर्थ है कि भारत ने केवल अधिक MBBS डॉक्टर तैयार करने की क्षमता नहीं बढ़ाई, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की Training capacity में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
2004 से 2026: लंबी यात्रा को देखें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है।
2004 के आसपास:
~221 मेडिकल कॉलेज
~24,000 MBBS सीटें
2014 के आसपास:
387 मेडिकल कॉलेज
51,348 MBBS सीटें
2026
846 मेडिकल कॉलेज
1,39,864 MBBS सीटें
यानी 2004 से 2026 के बीच मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग चार गुने के करीब और MBBS क्षमता लगभग छह गुने स्तर तक पहुंच गई है। हालांकि 2004 के आंकड़ों की Methodology बाद के NMC आंकड़ों से पूरी तरह समान नहीं है, इसलिए इनका उपयोग मुख्यतः दीर्घकालीन परिवर्तन की दिशा और पैमाने को समझने के लिए किया जाना चाहिए।
2014 के बाद बदलाव को क्यों महत्वपूर्ण?
2014 से 2026 के बीच हुए बदलाव को केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि इसके व्यापक प्रभावों के संदर्भ में देखना चाहिए। पहला, भारत में मेडिकल शिक्षा की कुल Capacity काफी बढ़ी है। दूसरा, सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सरकारी MBBS सीटों में भी बड़ा विस्तार हुआ है। तीसरा, जिला स्तर पर नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में काम हुआ है।
चौथा, MBBS के साथ PG और Super-speciality medical education के लिए भी Capacity बढ़ाई गई है। पांचवां, AIIMS जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का विस्तार हुआ है। इन सभी को मिलाकर देखें तो मेडिकल शिक्षा के Infrastructure में एक व्यापक परिवर्तन दिखाई देता है। लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह अंतिम लक्ष्य नहीं है। मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पर्याप्त Faculty, अच्छे Teaching hospitals, पर्याप्त मरीजों की Clinical exposure, आधुनिक Laboratories, Hostel facilities, Equipment और Internship व्यवस्था भी जरूरी है। इसीलिए आने वाले समय में भारत के लिए चुनौती दोहरी होगी—एक ओर मेडिकल सीटों का विस्तार जारी रखना और दूसरी ओर हर सीट पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा सुनिश्चित करना। इसके साथ ही यह भी जरूरी होगा कि नए मेडिकल कॉलेजों से तैयार होने वाले डॉक्टर देश के ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज क्षेत्रों तक पर्याप्त संख्या में पहुंचें।
निष्कर्ष
2014 से 2026: भारत की मेडिकल शिक्षा की ऊँची-ऊँची छलांग केवल एक आकर्षक शीर्षक नहीं, बल्कि आंकड़ों से दिखाई देने वाला एक बड़ा परिवर्तन है।
2014 से पहले भारत में 387 मेडिकल कॉलेज और 51,348 MBBS सीटें थीं। 2026 में यह संख्या बढ़कर 846 मेडिकल कॉलेज और 1,39,864 MBBS सीटें हो गई है। मेडिकल कॉलेजों में लगभग 118.6 प्रतिशत और MBBS सीटों में 172.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
सरकारी क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार हुआ है। लगभग 181 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संख्या 464 तक पहुंची, जबकि सरकारी MBBS सीटें लगभग 24,774 से बढ़कर 66,221 हो गईं।
इसके साथ 157 नए मेडिकल कॉलेज, 83 सरकारी कॉलेजों में 4,977 अतिरिक्त MBBS सीटें, आगे 5,023 अतिरिक्त सरकारी MBBS सीटों की योजना, 22 नए AIIMS, 2020-21 से 2025-26 के बीच 48,563 नई MBBS सीटें और 2025-26 में 43 नए मेडिकल कॉलेज—ये सभी भारत में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की अलग-अलग कड़ियां हैं।
2004 से 2026 की लंबी अवधि को देखने पर भारत की मेडिकल शिक्षा में बदलाव और भी स्पष्ट दिखाई देता है। लगभग 24 हजार MBBS सीटों से बढ़कर आज करीब 1.40 लाख सीटों तक पहुंचना देश की चिकित्सा शिक्षा क्षमता में एक बड़ा परिवर्तन है।
अब इस विस्तार का अगला चरण केवल “कितने मेडिकल कॉलेज और कितनी सीटें” नहीं होगा। असली लक्ष्य होगा—इन बढ़ी हुई सीटों से बेहतर प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार करना, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना और देश के हर हिस्से तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना। यही वह बिंदु है जहां भारत की बढ़ती मेडिकल शिक्षा क्षमता को एक मजबूत, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था में बदला जा सकता है।
