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नेत्र चिकित्सक डॉ. आजाद की पुस्तक का नीतीश कुमार ने किया विमोचन

पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। हाल ही सुपरिचित नेत्र चिकित्सक डॉ. राजवर्द्धन आजाद की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘सोने का हाथ’ का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विमोचन किया है। बड़ी बात यह है कि प्रोफेशनल क्षेत्र में सक्रियता के बाद भी साहित्य के प्रति उनके दिल में अनुराग बरकरार है।

प्रोफेशन के साथ साहित्य साधना भी

अपने व्यस्त समय से कुछ समय चुराकर उन्होंने दिनचर्या से जुड़े संस्मरणों को लिपिबद्ध करने में कामयाबी पायी है। वे न केवल राज रेटिना एंड आई केयर सेंन्टर चलाते हैं बल्कि बिहार विश्वद्यिालय सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर भी बिहार सरकार ने बिठा रखा है। विमोचन के मौके पर बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत मिश्र समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह जिज्ञासा हो सकती है कि डॉक्टरी पेशा और साहित्य सेवा क्या आज के समय में संभव है? इसी जिज्ञासा के तहत ‘स्वस्थ भारत’ ने उनसे बात की।

विरासत में मिला साहित्य

एक संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने बताया कि साहित्य न केवल उनमें अन्तर्निहित है बल्कि विरासत में मिला भी है। पारिवारिक माहौल भी साहित्यिक ही रहा। उनके पिता भागवत झा आजाद स्वयं मूलतः लिखने-पढ़ने वाले थे। वे राजनीति में भी सक्रिय रहे। बिहार के मुख्यमंत्री पद को भी सुशोभित किया। इस क्रम में डॉ. आजाद ने याद करते हुए कहा कि भागलपुर रहने के दौरान दिनकर, बच्चन, भवानी प्रसाद मिश्र जैसे ख्यात साहित्यकारों का उनके घर आना-जाना लगा रहता था। वे बताते हैं कि जब महादेवी वर्मा के पिताजी भागलपुर में पोस्टेड थे तब वे भी उनके घर आया करती थीं। ऐसे माहौल में साहित्य का अंकुरण और सिंचन हुआ जिसका समय-समय पर प्रस्फुटन होता रहता है।

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