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सुखद : अब मध्यप्रदेश में हिन्दी में होगी डॉक्टरी की पढ़ाई

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। देश में हिंदी में चिकित्सा शिक्षा का नया अध्याय आज से शुरू हो रहा है। मध्य प्रदेश पहला राज्य होगा, जहां चिकित्सा शिक्षा हिंदी में होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में एमबीबीएस हिंदी पाठ्यक्रम की पुस्तकों का विमोचन किया। यह पहले ही तय कर लिया गया था कि एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम से भी होगी।

शिक्षा क्षेत्र में पुनर्जागरण

दरअसल जिन छात्रों की अंग्रेजी अच्छी नहीं रहती है, उन्हें तकनीकी षिक्षा में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्योंकि ये संपन्न परिवार के नहीं होते। अंग्रेजीदां स्कूलों का खर्च उनके परिवार वाले नहीं उठा पाते। उनके लिए तो यह संभावनाओं का द्वार खोल देगा। इस लिहाज से एमपी का प्रयास स्तुत्य है। शाह ने भी इस मौके पर कहा कि आज का दिन भारत के शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। जब भी आने वाले दिनों में इतिहास लिखा जाएगा, आज के दिन को स्वर्ण के अक्षरों से लिखा जाएगा। ये देश में शिक्षा क्षेत्र के पुनर्जागरण का क्षण है। कई दूसरे देशों की तरह अब मध्यप्रदेश में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा हिंदी में होगी।

97 डॉक्टरों की टीम ने किया तैयार

जानकारी के अनुसार एमपी के 97 डॉक्टरों की टीम ने 4 महीने की कड़ी मेहनत कर अंग्रेजी की किताबों को हिंदी में तैयार किया है। राज्य सरकार भी इस नए प्रयोग को लेकर रोमांचित है। सरकार के इस नये प्रयोग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम शिवराज और उनके सभी मंत्री, विधायक सहित पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया अकाउंट पर डीपी व कवर फोटो बदला है। पहली बार ऐसी अनूठी पहल को लेकर प्रदेश के युवाओं में काफी उत्साह का माहौल है।

2018 से ही तकनीकी शिक्षा में हिंदी

सच यह भी है कि हिंदी में लिखने की सुविधा एमपी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने 2018 में ही शुरू कर दी थी। इसके परिणाम अच्छे रहे हैं। इस साल एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री की हिंदी में भी पढ़ाई कराई जाएगी। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. आरएस शर्मा ने कहा कि कई विद्यार्थियों ने इस व्यवस्था की तारीफ की थी। एमबीबीएस के करीब 10 प्रतिशत विद्यार्थी तब से हिंदी या फिर अंग्रेजी और हिंदी के मिले-जुले वाक्य परीक्षाओं में लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हिंदी में किताबें उपलब्ध होने पर विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में लिखना और आसान हो जाएगा। नेशनल मेडिकल कमीशन की भी यह बाध्यता नहीं है कि उत्तर अंग्रेजी में ही लिखे जाएं।

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