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एड्स से मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना

एड्स से मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। संभावना जताई जा रही है कि मौजूदा हालत में 2029 तक दुनिया में HIV/AIDS से मरने वालों की संख्या में इजाफा होगा क्योंकि इसकी रोकथाम पर भारी खर्च होता है जबकि फंड की कमी का खतरा सामने है। इस रोग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने साल की शुरुआत में इसकी रोकथाम और उपचार कार्यक्रमों के लिए विदेशी सहायता निधि रोकने का फैसला किया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा अगर इस दिशा में जल्द फिर से विचार न किया गया तो इस महामारी के फिर से उभरने की आशंका हो सकती है।

एड्स : हालत चिंतित करने वाला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीनों में अमेरिका के एक फैसले ने स्वास्थ्य को व्यवस्थागत झटका दे दिया था, जिसको लेकर संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है। उन्होंने आगे कहा कि अगर इस धन की भरपाई नहीं की गई, तो 2029 तक 40 लाख से ज्यादा एड्स से संबंधित मौतें और 60 लाख से ज्यादा HIVईवी संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। UNAIDS ने हाल ही जारी रिपोर्ट में कहा है कि धन की कमी ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को पहले ही अस्थिर कर दिया है, स्वास्थ्य सुविधाएं बंद कर दी हैं, हजारों स्वास्थ्य क्लीनिक बिना कर्मचारियों के रह गए हैं, रोकथाम कार्यक्रमों में बाधा आई है, एचआईवी परीक्षण के प्रयास बाधित हुए हैं और कई सामुदायिक संगठनों को अपनी एचआईवी गतिविधियों को कम करने या रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ये गंभीर चिंता का विषय है।

एड्स : प्रगति की रफ्तार थम जाएगी

UNAIDS ने यह भी कहा कि उसे डर है कि अमेरिका के फैसले के बाद अन्य प्रमुख दानदाता भी अपना सहयोग कम कर सकते हैं, जिससे दुनियाभर में एड्स के खिलाफ दशकों से हो रही प्रगति पर पानी फिर सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2025 तक वैश्विक HIV रिस्पॉस के लिए चार बिलियन डॉलर का वादा किया था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी विदेशी सहायता को निलंबित करने का आदेश दिया और बाद में अमेरिकी एआईडी एजेंसी को बंद करने का फैसला किया था। इस पर यूएस स्थित लिवरपूल विश्वविद्यालय में एचआईवी विशेषज्ञ एंड्रयू हिल ने कहा वैसे तो ट्रम्प को अमेरिकी धन को अपनी इच्छानुसार खर्च करने का अधिकार है, हालांकि कोई भी जिम्मेदार सरकार पहले से चेतावनी दे देती है ताकि देश योजना बना सके, बजाय इसके कि रातोंरात क्लीनिक बंद होने पर मरीजो को फंसा दिया जाए।

एड्स : 2003 से चल रही योजना

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की एड्स राहत आपातकालीन योजना या PEPFAR 2003 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा शुरू की गई थी, जो किसी भी देश द्वारा किसी एक बीमारी पर केंद्रित अब तक की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता थी। यूएनएड्स के अनुमान के अनुसार 2024 में दुनियाभर में एड्स से संबंधित लगभग 6.30 लाख मौतें हुईं। अमेरिकी वित्त पोषण में कटौती के बाद विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले दिनों में एचआईवी-एड्स के मामले और मौतों में फिर से वृद्धि हो सकती है।

एड्स : खतरनाक रोग

मालूम हो कि एचआईवी—एड्स बेहद खतरनाक बीमारी है जिसमें शरीर को बीमारियों के खिलाफ लड़ने की सारी शक्ति क्षीण हो जाती है यानी इसके रहते जब कोई बीमारी हुई तो यह ठीक नहीं होती। आज भी भारत में इसके 24 लाख मरीज हैं जबकि अमेरिका में 12 लाख और पूरी दुनिया में 3.77 लाख मरीज हैं। एचआईवी एक वायरस है जो कई माध्यमों से इंसान के शरीर में पहुंच कर इम्यूनिटी को तबाह कर देता है। अगर पहले से संक्रमित किसी व्यक्ति का खून किसी भी तरह से दूसरे व्यक्ति में पहुंच जाए तो उसे भी एचआईवी हो जाएगी। जैसे एक ही नीडल से संक्रमित व्यक्ति को इंजेक्शन दिया और फिर उसी नीडल से दूसरे व्यक्ति को इंजेक्शन दे दिया तो इससे उसे एचआईवी हो सकता है।

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