नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। कफ सिरप के नाम पर जहर बेचकर 21 बच्चों की मौत के जिम्मेवार चेन्नई के श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक जी रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप को देश के लगभग सभी राज्यों में बैन कर दिया गया है। रंगदाथन की जो कुंडली सामने आ रही है वह फार्मा सेक्टर में मुनाफाखोरी की पराकाष्ठा बता ही रही है, यह भी बता रही है कि दवा निर्माण से लेकर बाजार में उतारने तक जितने भी सरकारी चेक प्वायंट हैं, सब लापरवाह हैं। इस बीच डब्ल्यूएचओ ने भी इस प्रकरण पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
कफ सिरप: WHO ने कई सवाल पूछे
रिपोर्ट के अनुसार WHO ने भारत सरकार को ईमेल भेजकर बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा पर स्पष्टीकरण मांगा है। उसने सवाल उठाया कि भारत विश्व में कफ सिरप निर्यात में अग्रणी देश है तो निर्यात से पहले उनकी गुणवत्ता जांच व्यवस्था कितनी मजबूत है? मध्य प्रदेश जैसे हादसों को रोकने के लिए भारत ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? संदिग्ध दवाओं की निगरानी प्रणाली (फार्माकोविजिलेंस) किस स्तर पर काम कर रही है? जान लें कि कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की पहचान आसान नहीं होती। इसकी पुष्टि में कई महीने लग सकते हैं। यह रसायन सामान्यत: एंटी-फ्रीज एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जब यह दवाओं में मिल जाता है तो किडनी फेल होने, लकवा और मौत तक का कारण बन सकता है।
कफ सिरप: निर्माता की कुंडली
उधर प्रशासन ने जी रंगनाथन पर गैर इरादतन हत्या, बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने और दवाओं में मिलावट का मामला दर्ज किया गया है। जी रंगनाथन की पहचान दवा उद्यमी और श्रीसन फार्मा के प्रमुख के रूप में है। मद्रास मेडिकल कॉलेज से फार्मेसी में स्नातक, रंगनाथन का करियर चार दशकों से भी ज़्यादा लंबा है। उन्हें पहली बार 1980 के दशक की शुरुआत में प्रोनिट के लिए पहचान मिली, जो चेन्नई में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला एक पौष्टिक सिरप था, जिसका उन्होंने खुद डॉक्टरों को प्रचार किया और गर्भवती महिलाओं के लिए इसके लाभों पर ज़ोर दिया। इस पौष्टिक सिरप वाले प्रोडक्ट ने लोकप्रियता हासिल की, लेकिन बाद में राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने इसे सरकारी मंज़ूरी की आवश्यकता के कारण इसकी लिस्टिंग कर दी थी। इसके कुछ ऐसे इंग्रीनिएंट थे, जिनके लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है। तब रंगनाथन ने आवश्यक मंजूरी ली। बाद में तरल नाक उत्पादों के क्षेत्र में विस्तार किया और चेन्नई के आसपास कई छोटी यूनिट स्थापित कीं। पिछले कुछ वर्षों में वे श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के प्रमुख बने और सीगो लैब्स के साथ संबंध बनाए रखे, जबकि उनके सहयोगी इवेन हेल्थकेयर का प्रबंधन करते थे।
कफ सिरप: जहरीले तत्व से मौतें
तमिलनाडु में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की जांच हुई तो लैब की रिपोर्ट से पता चला कि इसमें हानिकारक तत्व मौजूद हैं। रिपोर्ट में इस सिरप को मानक गुणवत्ता में फेल और मिलावटी बताया गया है जिसमें 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल है। यह एक जहरीला रसायन जो आमतौर पर एंटीफ्रीज और ब्रेक द्रव में इस्तेमाल होता है, जो निगलने पर तीव्र गुर्दे की विफलता और मृत्यु का कारण बन सकता है।
