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नेशनल वन हेल्थ मिशन पर नागपुर में कार्यशाला

नेशनल वन हेल्थ मिशन पर नागपुर में कार्यशाला

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) के अंतर्गत नागपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ (NIOH) ने ICMR-RMRC, भुवनेश्वर के सहयोग से “ऑपरेशनल फ्रेमवर्क फॉर वन हेल्थ: नेशनल विजन एंड स्टेट एक्शन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन (Nation One Health Mission) के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्ययोजना बनाकर विचारों को वास्तविकता में बदलना था, ताकि राज्य और स्थानीय स्तर पर समन्वित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यशाला: एकीकृत निगरानी पर बल

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद ने मुख्य भाषण दिया। प्रो. सूद ने वर्चुअल माध्यम से वक्तव्य देते हुए एकीकृत निगरानी की तात्कालिक आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन हेल्थ केवल एक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और भविष्य के लिए महामारी की तैयारी की नींव है। महाराष्ट्र के पास संरचित वन हेल्थ कार्यान्वयन का एक मॉडल बनने की क्षमता है, जो यह दर्शाता है कि नीति, विज्ञान और शासन किस प्रकार प्रभावी रूप से समन्वित हो सकते हैं। मानव स्वास्थ्य निगरानी, पशु रोग रिपोर्टिंग, वन्यजीव निगरानी और पर्यावरणीय खुफिया तंत्र को समानांतर प्रणालियों से आगे बढ़कर परस्पर इंटरऑपरेबल बनना होगा, ताकि प्रारंभिक चेतावनी सुनिश्चित की जा सके, जो विभिन्न विभागों के बीच निर्बाध डेटा प्रवाह पर निर्भर करती है।

कार्यशाला: सामने जूनोटिक खतरा

इस अवसर पर डॉ. राजीव बहल ने मिशन की संरचना और महामारी तैयारी में अंतर-क्षेत्रीय समन्वय के महत्व को वर्चुअली रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन जूनोटिक खतरों से निपटने और चिकित्सा प्रतिकार उपायों को सुदृढ़ करने में ‘सम्पूर्ण-सरकार’ के दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। हमारी पारिस्थितिक विविधता और मानव-पशु के निकट संपर्क जटिल स्वास्थ्य इंटरफेस बनाते हैं, जहाँ नए खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी विभागों और तकनीकी साझेदारों के समन्वय के माध्यम से इन जोखिमों का प्रबंधन करने की हमारी क्षमता को सुदृढ़ करना राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने आगे राज्य और जिला स्तर पर महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया टीमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यशाला: दिग्गजों की रही उपस्थिति

दो दिवसीय कार्यशाला में जूनोटिक रोगों और संक्रमण के फैलाव (स्पिलओवर) के जोखिमों के जटिल परिदृश्य का अध्ययन किया गया। पहले दिन में तकनीकी सत्र और पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनका मुख्य ध्यान वन हेल्थ दृष्टिकोण के कार्यान्वयन पर था। दूसरे दिन बायोथ्रेट तैयारी, चिकित्सा निवारण उपायों के विकास, तथा वन्यजीव-संबंधित प्रकोपों की जांच पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। इसे डॉ. राजीव बहल और पशुपालन आयुक्त, डीएएचडी, दिल्ली की डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा ने भी संबोधित किया। उद्घाटन सत्र में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. नितिन पाटिल, कुलपति, एमएएफएसयू नागपुर (मुख्य अतिथि), डॉ. प्रशांत पी. जोशी, कार्यकारी निदेशक, एम्स नागपुर (विशिष्ट अतिथि), डॉ. रंजन दास, निदेशक, एनसीडीसी, नई दिल्ली (विशिष्ट अतिथि), डॉ. दीपक म्हैसकर (आईएएस), अध्यक्ष, एसईआईएए, महाराष्ट्र, डॉ. सतीश राजू, क्षेत्रीय संयुक्त आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी, नागपुर तथा डॉ. प्रज्ञा यादव, प्रभारी निदेशक, एनआईओएच, नागपुर शामिल थे।

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