नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। फरवरी 2026 तक AB-PMJAY योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 2018-19 में 6,917 (3,013 सरकारी और 3,904 निजी अस्पताल) से बढ़कर 19,483 सरकारी और 16,746 निजी अस्पतालों सहित 36,229 हो गई है। योजना के अंतर्गत सभी पात्र लाभार्थी देश भर में इन 36,229 सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। उक्त अवधि तक इस योजना के तहत कुल 11.69 करोड़ अस्पताल प्रवेशों को अधिकृत किया गया है, जिसमें निजी अस्पतालों में 6.74 करोड़ प्रवेश शामिल हैं। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार सूचीबद्ध अस्पताल पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा से इनकार नहीं कर सकते। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार में कोई अनियमितता हो या इलाज से इनकार किया जाए, तो लाभार्थी केंद्रीय शिकायत निवारण प्रबंधन प्रणाली (सीजीआरएमएस) या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14555 के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
लोकसभा: गैर-संचारी रोग
एक अन्य सवाल पर श्री जाधव ने जानकारी दी कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हिस्से के रूप में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NCD) के अंतर्गत देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह कार्यक्रम गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मानव संसाधन विकास, स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान, रेफरल, उपचार और स्वास्थ्य संवर्धन पर केंद्रित है। गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 479 जिला डे केयर सेंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6,410 एनसीडी क्लीनिक और 233 कार्डियक केयर यूनिट स्थापित की गई हैं। राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत मुख्य रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सामान्य कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा), क्रॉनिक किडनी रोग, एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (STEMI), क्रॉनिक श्वसन रोग (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज), नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) और स्ट्रोक पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
लोकसभा: 178 आदिवासी जिलों में पहुंच
श्री जाधव ने एक सवाल पर बताया कि देश में उप स्वास्थ्य केंद्रों (SHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को मजबूत करके कुल 1.84 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) संचालित किए गए हैं, जिनमें 178 आदिवासी जिलों में 31,023 एएएम शामिल हैं, जो निवारक, प्रोत्साहक, प्रशामक, पुनर्वास और उपचारात्मक देखभाल सहित व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। जनजातीय क्षेत्रों सहित देश भर के सभी कार्यरत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध टेलीकंसल्टेशन सेवाओं से लोगों को अपने घरों के पास ही विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है। इससे शारीरिक पहुंच संबंधी समस्याओं, सेवा प्रदाताओं की कमी और निरंतर देखभाल की सुविधा जैसी समस्याओं का समाधान होता है। 28.02.2026 तक एएएम में कुल 44.08 करोड़ टेलीकंसल्टेशन किए गए हैं। इसके अलावा 18.02.2026 तक आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान के तहत देश भर में 815 और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) के तहत 320 एमएमयू कार्यरत हैं।
लोकसभा: अनुसंधान के लिए 144.07 करोड़
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न पर जानकारी दी कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने 2025-26 के दौरान विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों को अनुसंधान अवसंरचना के विकास और अनुसंधान कार्यों के लिए 144.07 करोड़ रुपये जारी किए हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत वर्ष के दौरान जारी की गई धनराशि इस प्रकार है: वायरल अनुसंधान और निदान प्रयोगशालाएं (VRDL) 52.81 करोड़, बहु-विषयक अनुसंधान इकाई (MRU) 61.99 करोड़, भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTAEIN) 6.89 करोड़, डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज (DIAMONDS) 17.15 करोड़ और दिशा-निर्देश केंद्र को 5.23 करोड़। उन्होंने बताया कि देश में स्वास्थ्य अनुसंधान पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए सार्वजनिक निधि ही प्रमुख स्रोत बनी हुई है।
