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PMSMA: भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी: नड्डा

PMSMA: भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी: नड्डा

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने आज पूरे भारत में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में समर्पित सेवा के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने “पीएमएसएमए के 10 वर्ष – देखभाल का एक दशक” विषय के तहत राष्ट्रव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया। यह सुरक्षित गर्भावस्था और स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत की प्रमुख पहलों में से एक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सफल कार्यान्वयन के एक दशक की सफलता का प्रतीक है।

PMSMA: गर्व और संतोष का क्षण

श्री नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व और संतोष का क्षण है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए का सफल कार्यान्वयन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण को साकार करने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत देश के प्रत्येक परिवार के लिए सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात शिशु सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में, पीएमएसएमए ने न केवल देश भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक लचीले भारत के लिए एक मजबूत नींव भी रखी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि माताओं के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करना एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण और स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अत्यावश्यक है।

PMSMA: एक्सपर्ट देखभाल सुलभ

उन्होंने बताया कि पीएमएसएमए (प्रसव पूर्व प्रसवपूर्व देखभाल योजना) का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 9 जून 2016 को किया था। इसका उद्देश्य प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने पीएमएसएमए के तहत सरकार के साथ स्वेच्छा से साझेदारी करने वाले निजी अस्पतालों और चिकित्सा विशेषज्ञों के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार किया। इससे गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में, विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच को काफी मजबूत हुई है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षित गर्भावस्था सुनिश्चित करने में प्रसवपूर्व देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि सरकार के मातृ स्वास्थ्य देखभाल ढांचे के तहत गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच की सुविधा मिलती है। इसमें पीएमएसएमए के अंतर्गत विशेषज्ञ द्वारा की जाने वाली जांच भी शामिल है। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं की पहचान करने, उन पर नज़र रखने और उन्हें सहायता प्रदान करने में आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका के बारे में भी बताया।

PMSMA: प्रसव बाद भी निगरानी

जनवरी 2022 में विस्तारित पीएमएसएमए (ई-पीएमएसएमए) रणनीति के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की गहन निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ई-पीएमएसएमए के तहत, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को सूचीबद्ध किया जाता है, व्यक्तिगत रूप से ट्रैक किया जाता है और प्रसव के बाद 45 दिनों तक निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य मां और बच्चे दोनों के स्वस्थ स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि एसएमएस आधारित अलर्ट और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर सहयोग से देखभाल की निरंतरता और मजबूत हुई है। वहीं दूसरी ओर आशा कार्यकर्ताओं को दिए गए अतिरिक्त प्रोत्साहनों से सामुदायिक स्तर पर पहुंच और अनुवर्ती सेवाओं में सुधार करने में मदद मिली है। इस अवसर पर, श्री नड्डा ने पीएमएसएमए की दसवीं वर्षगांठ मनाने और देश में मातृ स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने में इसके योगदान को मान्यता देने के लिए एक विशेष 75 रुपये का स्मारक सिक्का और एक 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी किया।

PMSMA: मिली वैश्विक मान्यता

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में बताते हुए श्री नड्डा ने कहा कि भारत की प्रगति को वैश्विक मान्यता मिली है। संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु दर आकलन अंतर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 1990 से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की प्रभावशाली गिरावट दर्ज की है। यह वैश्विक औसत 48 प्रतिशत की गिरावट से कहीं अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 61 प्रतिशत है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर आकलन अंतर-एजेंसी समूह (यूएन-आईजीएमई) की रिपोर्ट में 1990 से 2024 के बीच नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 54 प्रतिशत है।

PMSMA: हर रिपोर्ट में सफलता दर्ज

इस अवसर पर श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दस वर्ष पूरे होने को भारत में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, पीएमएसएमए सरकार की सबसे प्रभावशाली जन स्वास्थ्य पहलों में से एक बनकर उभरा है। प्रदेशों में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पीएमएसएमए के तहत पंजीकृत हैं। इससे विशेष रूप से कम सुविधाओं वाले, दूरस्थ और महत्वाकांक्षी जिलों में विशेषज्ञ प्रसवपूर्व देखभाल तक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 2014-16 के दौरान प्रति लाख जन्मों पर 130 से घटकर 2022-24 के दौरान प्रति लाख जन्मों पर 87 हो गई है, जो 43 अंकों की कमी दर्शाती है। इसी प्रकार, नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जन्मों पर 24 से घटकर प्रति 1,000 जन्मों पर 18 हो गई है, जो माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

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