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रक्षाकमिर्यों को भी मिले आयुष की सुविधाएं: जाधव

रक्षाकमिर्यों को भी मिले आयुष की सुविधाएं: जाधव

नयी दिल्ली स्वस्थ भारत मीडिया। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर सैन्य और फील्ड अस्पतालों में आयुष (Ayush) ओपीडी की स्थापना और आयुष आधारित उपचार सेवाएं प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने अपने संदेश में विभिन्न और अक्सर चुनौतीपूर्ण सैन्य परिस्थितियों में सेवारत देश के सैनिकों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया है। श्री जाधव ने कहा कि यद्यपि सशस्त्र बलों के पास एक मजबूत आधुनिक चिकित्सा अवसंरचना है, फिर भी भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को इसमें शामिल करने से रक्षा कर्मियों के लिए निवारक, संवर्धक और समग्र स्वास्थ्य सेवा को और अधिक मजबूती मिल सकती है।

हेल्थ सेवा को मिलेगी मजबूती

श्री जाधव ने कहा कि वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अधीन कुछ ही संस्थानों में आयुष उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं और बड़ी संख्या में सैन्य और क्षेत्रीय अस्पतालों में अभी तक आयुष सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन अस्पतालों में आयुष सुविधाओं का विस्तार करने से सैनिकों को साक्ष्य-आधारित पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल, विशेष रूप से निवारक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्रों में अधिक पहुंच सुनिश्चित होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया है कि आयुष सेवाओं को शामिल करने से मौजूदा स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूती मिलेगी और सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए अधिक व्यापक और रोगी-केंद्रित देखभाल मॉडल विकसित करने में योगदान मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पहल से भारत की समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा विरासत को देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के साथ जोड़ने की प्रक्रिया को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

आयुष OPD बने

केंद्रीय मंत्री ने रक्षा मंत्रालय से सभी सैन्य एवं फील्ड अस्पतालों में आयुष ओपीडी और उपचार सुविधाएं स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयुष मंत्रालय इस पहल के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए आवश्यक सभी तकनीकी सहायता, व्यावसायिक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिसमें समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी शामिल है। यह प्रस्तावित सहयोग एकीकृत स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लाभ देश के सशस्त्र बलों के कर्मियों सहित समाज के एक व्यापक वर्ग को उपलब्ध कराए जाने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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