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बेटी होने पर अपने अस्पताल में बांटते हैं मिठाइयां…

गाय, गंगा और गौरी की चर्चा इन दिनों पूरे हिन्दुस्तान में जोर शोर से हो रही है। तीनों ही स्त्रीवादी शक्तियां हैं जिनका रक्षण व संरक्षण मानवीय बचाव के लिए बहुत जरूरी है। इसी कड़ी में गौरी यानी लड़की को बचाने का बिड़ा उठाया है डॉ. गणेश राख ने।  महाराष्ट्र के पुणे शहर के रहने वालने डॉ. राख ने मुलगी वाचवा यानी बेटी बचाओ अभियान के माध्यम से जो बिगुल फूंका है उसकी गुंज पूरे हिन्दुस्तान में सुनाई पड़  रही है। इस नेकदिल, हंसमुख व जनसरोकारी चिकित्सक से स्वस्थ भारत अभियान के विशेष प्रतिनिधि विनय कुमार भारती ने बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंशः

बेटी वचाओ अभियान के नायक डॉ. गणेश राख
बेटी वचाओ अभियान के नायक डॉ. गणेश राख

स्वस्थ भारत अभियान : आपको बेटी बचाओ अभियान की प्रेरणा कहाँ से मिली आखिर ऐसी क्या सूझी की आप बेटी बचाने निकल पड़े
डॉ. राख : सबसे पहले हमें देखना होगा की आखिर गर्भ में बेटियों को कौन मार रहा है! किसे पता होता है की गर्भ में बेटा है या बेटी ? जाहिर है डॉक्टर का नाम सबसे पहले आता है। जब -जब कन्या भ्रूण हत्या की मामले आते है तब-तब एक डॉक्टर ने मेडिकल एथिक्स ताक पर रखा होता है। सेवा भाव को परे रखकर चंद पैसों के लिए अपनी कसम तोड़ी होती है। आज जितनी भी बेटियां जन्म लेने से पहले गर्भ में ही मार दी गई हैं उन सबके पीछे किसी न किसी डॉक्टर का ही हाथ है। मेरा मानना है की कन्या भ्रूण हत्या की शुरुवात जब डॉक्टर ने ही की तो इसे ख़त्म भी डॉक्टर ही करेंगे! ऐसे में मैंने तय किया इस कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाऊंगा। मैंने अपने पिता को जब यह बात बताई तो उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखते हुए अपना आशीर्वाद दिया। और फिर शुरू हुआ मंजिल पाने तक न रूकने वाला एक अभियान जिसका नाम है ‘बेटी बचाओ अभियान…’
 

आज जितनी भी बेटियां जन्म लेने से पहले गर्भ में ही मार दी गई हैं उन सबके पीछे किसी न किसी डॉक्टर का ही हाथ है। मेरा मानना है की कन्या भ्रूण हत्या की शुरुवात जब डॉक्टर ने ही की तो इसे ख़त्म भी डॉक्टर ही करेंगे! ऐसे में मैंने तय किया इस कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाऊंगा

स्वस्थ भारत अभियान : आप बेटी जन्म होने पर अपनी फीस नहीं लेते हैं, इसके पीछे क्या कारण है?
डॉ राख : मैं अक्सर नोटिस करता था कि जब मेरे अस्पताल में कोई लड़का जन्म लेता है तो माता-पिता पेमेंट देने में तनिक भी नहीं हिचकते।कई बार तो साथ आये रिश्तेदार भी भी पैसे देने लगते हैं। वहीं दूसरी तरफ जब बेटी के जन्म की सूचना दी जाती थी तो उनके चेहरे पर मायूसी

मुलगी (बेटी) बचाओ अभियान का पोस्टर
मुलगी (बेटी) बचाओ अभियान का पोस्टर

छा जाती। कई बार तो ऐसा हुआ की बेटी के जन्म होने पर परिजन पेमेंट में डिस्काउंट मांगते थे या फिर फीस देने में आनाकानी तक करते थे। बेटी होने की खबर मात्र से कईयों का व्यवहार इतना चिड़चिड़ा हो जाता कि अस्पताल कर्मचारियों से भी उलझ बैठते थे। कई बार अस्पताल के कर्मचारी हिंसा के भी शिकार हुए हैं। अस्पताल कर्मचारियों के लिए तो बेटी होने कि सूचना देना अपने आप में चुनौती भरा काम था। ऐसा लगता मानो कोई अप्रिय सूचना दे रहे हों। पिताजी की सहमति मिलते ही मैंने अपने अस्पताल के कर्मचारीयों को जब बेटी होने पर फ्री डिलेवरी वाला आईडिया सुझाया तो पहले तो वे नाराज़ हुए फिर सबने अपनी सहमति जता दी और तन मन से लग गए।
स्वस्थ भारत अभियान : क्या आपको नुकसान की चिंता नहीं हुई ? अपने कर्मचारिओं का वेतन अस्पताल का खर्च वगैरह …
डॉ. राख : सबसे पहले तो यह बताऊँ की मुझे अपने अस्पताल के कर्मचारीयों पर गर्व है। बगैर उनके सहयोग से मैं बेटी बचाओ अभियान के बारे में सोच भी नहीं सकता था। उनके बगैर एक कदम नहीं बढ़ पाता। मेरे सारे कर्मचारी इस बात से सशंकित थे की  फ्री डिलेवरी वाले आईडिया  से उनके वेतन में कटौती की जा सकती है। अस्पताल कर्मियों ने आपस में बातचीत कर अपना वेतन भत्ते की कटौती तक का प्रस्ताव खुद ही मेरे सामने रख दिया। हालांकि मैंने कर्मचारीयों के वेतन में कटौती से मना किया। हाँ, कई बार बजट की समस्या आई। कई बार उन्हें देर से वेतन मिला। पर आज तक किसी कर्मचारी ने इसकी शिकायत नहीं की। चूँकि मेरे लिए वे केवल अस्पताल कर्मी नहीं बल्कि एक परिवार की तरह हैं।
स्वस्थ भारत अभियान : सुना है बेटी होने पर आपके अस्पताल में उत्सव मनाया जाता है ?
बेटी जन्म पर बधाई देते अस्पताल कर्मी
बेटी जन्म पर बधाई देते अस्पताल कर्मी

डॉ. राख : चूँकि बेटी के जन्म पर हमने मेहनत की है तो जाहिर  है सबसे पहले उत्सव मनाने का हक़ भी हमें है।  बेटी के जन्म पर केक काटे जाते हैं। गीत गाए जाते हैं। यहाँ तक की परिजनों को मिठाइयाँ भी अस्पताल ही खिलाता है। ये मौका हम नहीं छोड़ते साहेब ( हँसते हुए )
स्वस्थ भारत अभियान : हाल में ही आपने दहेज़ के लिए जलाई गई लड़कियों के लिए मुफ्त बर्न सेवा भी शुरू की है। चूँकि बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टर का खर्च, आईसीयू में महँगी मशीनों कर्मचारियों, महँगी दवाई जैसे अन्य खर्च। पहले से ही नुकसान उठा रहे डॉ. गणेश राख ने एक और नुकसान की शुरुवात की। नुक्सान उठाने के भी अपना आनंद है, क्यों?
डॉ. राख : हमें मालूम है की आर्थिक नुकसान है। क्योंकि मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है तो तरह-तरह के केस आते हैं। मेरे अस्पताल में जब दहेज़ के कारण जली हुई लड़कियों के केस आते है तो हमलोग मुफ्त इलाज़ करते हैं। हम और आप अच्छी तरह समझ सकते हैं कि उस माता- पिता की क्या स्थिति होती होगी जिसकी अपनी बेटी दहेज़ ना देने के कारण जला दी गई। अगर उसके पास पैसे होते तो वे अस्पताल तक ऐसी हालत में पहुँचते ही नहीं। ऐसे कामों में नुकसान तो होता है पर खुशियां बहुत ज्यादा मिलती है। आपने सही कहा इस नुक्सान का अपना अलग ही आनंद है।
स्वस्थ भारत अभियान : आपको क्या लगता है बेटियों को लेकर लोगों की मानसिकता में पहले की अपेक्षा कुछ बदलाव हुए हैं ?  
डॉ. राख : निश्चित तौर पर सामाजिक जागरूकता बढ़ी है। माहौल तेज़ी से बदल रहा हैं। परन्तु आज भी लोगों में बेटे की चाहत ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही है। हालत बदले जरूर हैं पर अब भी लिंग अनुपात को बराबर करने के लिए हर स्तर पर मेहनत करने की जरुरत है। ऐसे में सबकी सहभागिता जरुरी है।
स्वस्थ भारत अभियान : मुलगी वाचवा (बेटी बचाओ अभियान) को लेकर आपकी क्या आशाएं हैं, आखिर बेटियों को बचाने का आपका सपना कैसे पूर्ण होगा ?
डॉ. राख : देखिये, हम डॉक्टर इस बात से कभी इंकार नहीं कर पायेगे की कन्या भ्रूण हत्या में हम डॉक्टरों का ही हाथ है। आज जब बेटियों को बचाने बात आई है तो डॉक्टर समुदाय को ही आगे आना होगा। मैं स्वस्थ भारत अभियान के माध्यम से देश के तमाम डॉक्टरों से अपील करता हूँ की अपने जीवन में कम से कम एक बेटी के जन्म पर कोई शुल्क न लें और उसके जन्म पर खुशियां बाँटे। एक डॉक्टर या अस्पताल के लिए एक डिलीवरी फ्री करना मुश्किल काम नहीं। यह बहुत छोटी-सी बात है पर इससे समाज में जागरूकता का सन्देश जाएगा। डाक्टरी पेशे की छवि भी सुधरेगी ज्यादा आर्थिक नुकसान नहीं होगा। बेटी होने पर एक फ्री डिलीवरी वाली मुहीम बेटी बचाओ अभियान को आगे बढ़ाने के लिए काफी मददगार होगी ।
 डॉ. गणेश राखः एक परिचयः डॉ गणेश राख पुणे के चिकित्सक हैं और मेडिकेयर हॉस्पिटल फाउंडेशन चलाते हैं। गरीबी में पले बढे डॉ. राख अपना आदर्श अपने पिता आदिनाथ विट्ठल राख को मानते हैं। डॉ. गणेश राख को बेटी वचाओ अभियान को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने सम्मानित किया हैं।
संपर्कःDr. Ganesh Rakh

Medicare Hospital, Near Amanora City, Hadapsar, Pune- 411028. (Maharashtra).

Tel. No. 020 – 60506065/66

Mobile No.- 09850403026

Email: [email protected]

स्वस्थ भारत अभियान का समर्थन
स्वस्थ भारत अभियान  डॉ. गणेश राख के अनूठे मुलगी वाचवा यानी बेटी बचाओ अभियान  का समर्थन करता है और आशा करता है कि देश के और डॉक्टर भी उनके बढ़े हुए हाथ से अपना हाथ मिलायेंगे।
 
 
 
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1 comment

dr tarendra dehariya October 4, 2015 at 1:27 pm

मुझे डॉ.लोकेशजी का लेख बहुत बढिया लगा.शासन को ऐसे ही कदम उढाने चाहिये जैसे कि डॉ दवे सर ने उललेख किया है.बहुत बहुत धंनयवाद सर

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