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BIS ने तैयार किये ग्रासरूट नवाचार मानक

नयी दिल्ली। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा स्थापित मानक एक विशेष चरण के बाद विदेशी बाजारों में उत्पादों के विस्तार के लिए आवश्यक होते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा पहली बार ग्रासरूट नवाचार के लिए आधिकारिक मानक स्थापित किये गए हैं। वांकानेर, गुजरात के मनसुखभाई प्रजापति द्वारा विकसित मिट्टी से बने कूलिंग कैबिनेट मिट्टीकूल के लिए यह आधिकारिक ग्रासरूट मानक स्थापित किये गए हैं।

मिट्टी से बना कूलिंग कैबिनेट विकसित

स्वायत्त निकाय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से सम्बद्ध नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित इनोवेशन स्कॉलर्स इन-रेसिडेंस कार्यक्रम में इस विचार को सामने रखा गया था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा इस संबंध में जारी वक्तव्य के अनुसार BIS ने इस अभिनव तकनीक का संज्ञान लिया और बाद में NIF के साथ मिलकर एक नया भारतीय मानक-IS 17693: 2022 ‘मिट्टी से बना गैर-इलेक्ट्रिक कूलिंग कैबिनेट‘ विकसित किया है।

ताजा रहेंगे खाद्य पदार्थ

नये मानक, प्राकृतिक रूप से काम करने वाले मिट्टी से बने रेफ्रिजरेटर, जो वाष्पीकरणीय शीतलन के सिद्धांत पर संचालित होता है, के कूलिंग कैबिनेट के निर्माण और प्रदर्शन को निर्दिष्ट करते हैं। इन कूलिंग कैबिनेट्स का उपयोग बिजली की आवश्यकता के बिना खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है। यह खाद्य पदार्थों को प्राकृतिक शीतलता प्रदान करता है ताकि वे अपनी गुणवत्ता खोये बिना ताजा बने रहें।

परांपरा को जीवित रखेगा

‘मिट्टीकूल रेफ्रिजरेटर‘ का प्रभाव उल्लेखनीय रहा है और बीआईएस मानकों को स्थापित करने के बाद यह आगे बढ़ने की ओर अग्रसर है। यह पहल मिट्टी के बर्तनों की संस्कृति, परंपरा और विरासत को पुनर्जीवित करने में प्रमुख भूमिका निभाने के साथ-साथ लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने, निर्धन समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, हरित विकल्प उपलब्ध कराकर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास व रोजगार सृजन में प्रभावी बतायी जा रही है। ये मानक 17 संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) में से 06 लक्ष्यों को पूरा करने के लिए BIS के प्रयास में मदद करते हैं। इन लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा, उद्योग, नवाचार एवं बुनियादी ढांचा, जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन शामिल है।

इंडिया साइंस वायर से साभार

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