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कोविड-19 के विरुद्ध पूर्व सैनिकों ने खोला मोर्चा

COVID-19 is caused by the novel SARS coronavirus-2 (SARS-CoV-2) and it is resulting in many deaths.  However, a large number of infected people are also recovering despite not having any specific treatment. This is because of antibodies produced within the body in response to the virus invasion.

सैनिक हमेशा सैनिक ही होता है। चाहे वह ऑन ड्यूटी हो या ऑफ ड्यूटी। देश के पूर्व सैनिकों ने इस बात को सच कर दिखाया है।वैश्विक महामारी कोविड-19 निपटने में सेना, नौ सेना और वायु सेना से संबंधित पूर्व-सैनिक (ईएसएम) नागरिक प्रशासन साथ दे रहे हैं और स्वेच्छा एवं निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

आशुतोष कुमार सिंह

पूर्व-सैनिक कल्याण विभाग (डीईएसडब्ल्यू), रक्षा मंत्रालय पूर्व-सैनिकों के साथ समन्वय कर रहा है। केंद्रीय सैनिक बोर्ड पूरे देश में राज्य स्तर पर 32 राज्य सैनिक बोर्डों और 403 जिला सैनिक बोर्डों के नेटवर्क के माध्यम से संपर्क में है। आइए जानते हैं देश में कहां पर कौन क्या कर रहा है…

कर्नाटक

ब्रिगेडियर रवि मुनिस्वामी (सेवानिवृत्त) कर्नाटक में इस प्रयास का समन्वय कर रहे हैं। वह बंगलुरू में पूर्व-सैनिकों के 45 अनुभवी साइकिल सवार दल का नेतृत्व कर रहे हैं जो एक व्हाट्सएप समूह के माध्यम से शहर में वृद्धों और अशक्तों को दवाइयां और आवश्यक आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा धारवाड़, दावनगेरे, शिवामोगा, हासन, मैसूर और कोडगू में कई पूर्व-सैनिक स्वयंसेवक भोजन वितरण और लॉकडाउन प्रबंधन में सहायता कर रहे हैं।

आंध्र प्रदेश

लगभग 300 पूर्व-सैनिक स्वयंसेवक आंध्र प्रदेश में पुलिस की सहायता कर रहे हैं। मंगलगिरी में ताडेपल्लीगुडेम, पश्चिम गोदावरी जिला संघ और 28 एयर डिफेंस रेजिमेंट पूर्व-सैनिक संगठन जैसे कुछ पूर्व-सैनिक संघ गरीबों के बीच भोजन और आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर रहे हैं। श्री चैतन्य पूर्व-सैनिक संघ, भीमुनिपट्टनम लॉकडाउन को सफल बनाने में पुलिस की सहायता कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश

ब्रिगेडियर रवि (सेवानिवृत्त) के अनुसार उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में जिला सैनिक बोर्ड वयोवृद्ध पूर्व-सैनिकों की सहायता करने के साथ-साथ राशन वितरण, सामुदायिक निगरानी और जरूरतमंदों के लिए सामुदायिक रसोई घर चलाने की निगरानी में पूर्व-सैनिकों की एक टीम के साथ सहायता कर रहा है। वे पहले ही राज्य में सेना चिकित्सा कोर से 6,592 पूर्व-सैनिकों की पहचान कर उनसे संपर्क कर चुके हैं और वे किसी भी आकस्मिकता के लिए तैयार अवस्था में हैं।

पंजाब

पंजाब राज्य सैनिक बोर्ड निदेशक ब्रिगेडियर सतिंदर सिंह (सेवानिवृत्त) ने जानकारी दी है कि उन्होंने 4,200 पूर्व-सैनिकों को शासन संरक्षक के रूप में नियुक्त किया है जो पंजाब के हर गांव में डाटा संग्रह और सामुदायिक निगरानी के लिए मौजूद हैं।

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में इस कार्य का समन्वय कर रहे एयर सीएमडीई ए एन कुलकर्णी, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने जानकारी दी है कि बिलासपुर, जांजगीर और कोरबा में कुछ पूर्व-सैनिक राज्य पुलिस को सहायता प्रदान कर रहे हैं।

उत्तर-पूर्व

ब्रिगेडियर नारायण दत्त जोशी, एसएम (सेवानिवृत्त) 300 पूर्व-सैनिक स्वयंसेवकों के साथ असम के 19 जिलों में सहायता के लिए तैयार हैं। जबकि शिलांग में कर्नल गौतम कुमार राय (सेवानिवृत्त) 79 स्वयंसेवकों के साथ सिविल प्रशासन की सहायता के लिए तैयार हैं। त्रिपुरा से ब्रिगेडियर जेपी तिवारी (सेवानिवृत्त) ने बताया है कि पूर्व-सैनिक स्वयंसेवकों की सूची राज्य और जिला प्रशासन के साथ साझा की गई है और वे सौंपे गए किसी भी कार्य को करने के लिए तैयार हैं।

झारखंड, हरियाणा एवं उत्तराखंड

इसी तरह झारखंड से ब्रिगेडियर पाठक (सेवानिवृत्त), हरियाणा से कर्नल राहुल यादव (सेवानिवृत्त) और उत्तराखंड से ब्रिगेडियर केबी चंद (सेवानिवृत्त) ने अपने-अपने राज्यों में ऐसा ही किया है। ऐसे समय में जब पूरा राष्ट्र लॉकडाउन के अधीन है, सेना, नौ सेना और वायु सेना के सेवानिवृत्त कार्मिकों के साथ-साथ पूर्व- सैनिक संघ स्वयंसेवकों द्वारा सामुदायिक सेवा के कार्य बहुत प्रशंसनीय है।

 

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