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शिक्षा के साथ संस्कृति, संस्कार और धर्म जुड़ा है : कैलाश सत्यार्थी

दिल्ली में तीन दिवसीय ज्ञानोत्सव का शुभारंभ

अजय वर्मा

नई दिल्ली। ज्ञानोत्सव ज्ञान का उत्सव ही नहीं, यह ज्ञान का यज्ञ है। सात्विक उद्देश्य से किए जाने वाले यज्ञ में सर्वश्रेष्ठ की आहुति देनी होती है। इस ज्ञानोत्सव में आने वाले साधारण कार्यकर्ता नहीं बल्कि आप भारत के निर्माता हैं। भारतीयता माँ के दूध के समान है जो रक्त का संचार करता है। भारतीय शिक्षा समावेशिता की यात्रा करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल में सार्वभौमिकता, समता और समग्रता है। विद्या हमारे धर्म का लक्षण हैं। आप सभी श्रेष्ठ भारत के निर्माण में शिक्षा के क्रियान्वयन में भागीदार बनें ऐसी आशा करता हूँ।

शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर विमर्श

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ज्ञानोत्सव के शुभारंभ के मुख्य अतिथि के रूप मे व्यक्त किए। न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए ज्ञानोत्सव में चिंतन, मनन और समाधान पर चर्चा होगी। अपने ध्येय वाक्यों को हम सार्थकता की ओर ले जा रहें हैं। देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलना होगा। समाज में परिवर्तन शिक्षा से ही किया जा सकता है। राज्य तथा नगर स्तर तक ज्ञानोत्सव के आयोजन की योजना है। सरकार ने जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई है उसके क्रियान्वयन में समाज की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

निरंतरता ही देश की खासियत

सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि पूरे देश में एक निरंतरता है। एक राष्ट्र, एक समाज और एक संस्कृति भारत की विशेषता है। अब देश में अमृतकाल प्रारंभ हो चुका है। आने वाले 25 वर्षों में इसकी पूर्णता पर भारत का रूप दैदिप्यमान दिखाई देगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण अपने आप में एक संकेत है। परिवर्तन की इच्छा रखिए, प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही परिवर्तन आते हैं। हमें प्रयासों की मात्रा बढ़ानी होगी।

शिक्षा क्षेत्र में नयी फसल का निर्माण

स्वागत वक्तव्य देते हुए आयोजन प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि हम सब शिक्षा के क्षेत्र में ताकतवर फसल के निर्माण का कार्य कर रहे हैं। शिक्षा में परिवर्तन लाने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन ज्ञानोत्सव के माध्यम से सार्थक सिद्ध होगा। अध्यक्षीय उद्बोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर ने कहा कि शिक्षा प्रगति का उपकर्म है। शिक्षा रोजगार उन्मुखी, संस्कार उन्मुखी, राष्ट्र उन्मुखी होनी चाहिए। न्यास के गठन से पहले शिक्षा बचाओ आंदोलन कार्य कर रहा था। यह आंदोलन शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन कर पाया है। अब उसका क्रियान्वयन होगा।

कई शिक्षण संस्थानों की भागीदारी

शुभारंभ सत्र में संयोजक ओम शर्मा ने आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. पंकज मित्तल ने किया। उद्घाटन सत्र के पूर्व प्रदर्शनी का शुभारम्भ कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार; शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी और एआईओयू की महासचिव श्रीमती पंकज मित्तल द्वारा किया गया। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर 80 से भी अधिक विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने भाग लिया।

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