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आयुष / Aayush

आयुष डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, मिला कोरोना वायरस पर शोध का अधिकार

भारत सरकार ने गजेट नोटिफिकेशन जारी कर के आयुष डॉक्टरों को कोरोना वायरस

पर शोध करने का अधिकार दे दिया है। पूरी खबर लेकर आए हैं आशुतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली/24.04.20
भारत सरकार ने गजेट नोटिफिकेशन जारी कर के आयुष पैथी के चिकित्सकों को कोरोना वायरस पर शोध करने का अधिकार दे दिया है। इसकी मांग आयुष चिकित्सक लगातार मांग रहे थे। आयुष पैथियों में कोरोना वायरस की रोकथाम की संभावना को देखते हुए भारत सरकार ने 21 अप्रैल, 2020 को कोरोना वायरस के रिसर्च में आयुष को शामिल करने फैसला किया है।
भारत सरकार के (फाइल संख्या एल 11011/08/2020/एएस.-) इस नोटिफिकेशन में साफ-साफ लिखा गया है कि, सार्स Cov-2 के कारण उत्पन्न कोविड-19 के मद्देनजर, कोविड-19 के संभावित उपचार का दावा करने  के बारे में आयुष मंत्रालय में बड़ी संख्या में प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

21 अप्रैल,2020 को भारत सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों को कोरोना वायरस पर शोध करने का अधिकार संबंधित नोटिफिकेशन
21 अप्रैल,2020 को भारत सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों को कोरोना वायरस पर शोध करने का अधिकार संबंधित नोटिफिकेशन

नोटिफिकेशन में यह माना गया है कि वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए कोई अनुमोदित उपचार मौजूद नहीं है। समुदाय में ऐसे हालात पैदा हो जाने पर भारतीय पारंपरिक औषधियों के उपयोग,प्राचीन संदर्भों की भारी संख्या और वैज्ञानिक पत्रिकाओं में उनके फाइटो-रासायनिक घटकों पर बड़ी संख्या प्रकाशन, कार्रवाई की विधा, नैदानिक प्रभावकारिता आदि के कारण इनके उपयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। साथ ही यह भी लिखा गया है कि, ऐसे में समय में कोरोना वायरस की रोकथाम/ प्रबंधन पर किसी भी आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध या होम्योपैथी औषधयोगों के उपयोग के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण होना भी आवश्यक है। इसलिए औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के अंतर्गत मान्यताप्राप्त किसी भी आयुष पद्धति पर आधारित औषधियों के विकास के लिए गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता को महसूस किया गया है।

आयुर्वेदाचार्यों ने कहा कोरोना को आयुर्वेद हरा सकता है

इस नोटिफिकेसन में साफ-साफ लिखा है कि, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी औषधियों के नैदानिक परीक्षण आयोजित करने के लिए औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम -1945 में कोई विशिष्ट नियामक प्रावधान नहीं है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि उत्पन्न नैदानिक डेटा वैज्ञानिक रूप से मान्य और विश्वसनीय हो।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस संदर्भ में मंत्रालय ने डीसीजीआई, सीडीएससीओ के साथ-साथ अन्य अनुसंधान विशेषज्ञों के साथ परामर्श किया है।

उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी है नई कार्य-संस्कृति अपनाना

नोटिफिकेशन में जारी दस्तावेज के अनुसार- सीडीएससीओ के साथ किए गए परामर्श के आधार पर, आयुष मंत्रालय ने आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के अनुमोदन के साथ यह सूचित किया है कि आईएमसीसी अधिनियम, 1970, एचसीसी अधिनियम 1973 और एनएमसी अधिनियम 2019 (पूर्व में आइएमसी अधिनियम-1956) के तहत किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, चिकित्सक कोविड-19 पर  आयुर्वेद, सिद्ध,यूनानी और होम्योपैथी प्रणालियों के माध्यम से शोध कर सकते हैं, जिसमें रोग निरोधी उपाय, संगरोध के दौरान हस्तक्षेप, कोविड-19 के स्पर्शोन्मुख और लक्षणात्मक मामले, सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान, सर्वेक्षण, सबूत उत्पन्न करने के लिए प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान आदि शामिल हैं।

कोविड-19 की हर्बल दवा पर शोध कर रहे हैं भारतीय वैज्ञानिक

इतना ही नहीं इस दस्तावेज में कुछ शर्तों की भी चर्चा की गई है। जिसका अनुपालन करना अनिवार्य है। जिन्हें निम्न बिन्दुओं में समझा जा सकता है।

  1. प्रस्तावों को उनके वैज्ञानिक सलाहकार निकायों और संस्थागत नैतिक समितियों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।
  2. यदि यह नैदानिक परीक्षण, तो परियोजना को सीटीआरआई के साथ पंजीकृत होना चाहिए।
  3. नमूने का आकार सांख्किीय औचित्य पर आधारित होना चाहिए।
  4. नैदानिक अनुसंधान अथवा आईसीएमआर दिशा-निर्देशों के लिए बनाए गए आयुष दिशा-निर्देशों के अनुसार नैदानिक अनुसंधान आयोजित किया जाना चाहिए।
  5. जैव-चिकित्सा और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए प्रासंगिक नियमों का अनुपालन।
  6. अच्छे नैदानिक अभ्यास दिशा निर्देशों का अनुपालन
  7. आईसीएमार द्वारा प्रकाशित मानव भागीदारी पर जैव-चिकित्सा और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय नैतिक दिशा-निर्देशों का अनुपालन।
  8. किसी अन्य प्रवृत्त प्रासंगिक नियमों का अनुपालन।
  9. प्रत्येक स्थल पर आयुष पंजीकृत चिकित्सक / विशेषज्ञ अध्ययन दल का हिस्सा होना चाहिए।

इनके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि कोई भी संस्था/ संगठन के लिए अनिवार्य होगा की वह अनुसंधान की समय सीमा और परिणाम के अनुसार अनुसंधान संबंधी विकास के बारे में आयुष मंत्रालय, सरकार  को अवगत कराये।
आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव पी.एन.रंजीत सिंह के हस्ताक्षर जारी यह नोटिफिकेशन आयुष पैथियों के लिए संजीवनी बन सकता है। बशर्ते ये पैथियां बताए मापदंड़ों के अनुसार कारगर शोध प्रस्तुत करें।

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