स्वस्थ भारत मीडिया
मन की बात / Mind Matter

स्वस्थ जीवन और समाज के लिए हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना होगा

महिमा सिंह

75 वर्ष के युवा भारत के लिए नए लक्ष्य और विकास के आयाम का निर्धारण हो रहा है। विश्व में सबसे अधिक युवा आबादी भारत में है, जो ऊर्जा से लबरेज है और फिर दुनिया के नक्शे पर भारत का वही रुतबा स्थापित करने को बेताब है। भारत का एक राष्ट्र के रूप में व्यक्तित्व तब निखरेगा जब भारत आध्यात्मिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, तकनीकी, शिक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से सम्पन्न होगा। 21वीं सदी के भारत का यही विकास का पैमाना है। लेकिन नई सरकार और नए राष्ट्रीय दल का सोचना कुछ और है।

उत्तम स्वास्थ्य देश की पूंजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रीगण और उनकी पार्टी जिस विचारधारा से उभरी है, वो भी मानते हैं कि हर व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम होगा तभी राष्ट्र स्वास्थ्य और विकसित होगा। विकास की विचारधारा समग्रता में चलती है। भाजपा अपनी जनता को समग्रता में विकसित करना चाहती है। इसलिए बीते दस वर्षों में लाई गई नीतियों को देखें तो सहज ही इनका लक्ष्य समझा जा सकता है। राष्ट्रवाद और स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, सबका साथ सबका विश्वास, साथ लेकर चलने की धारना, योग, अध्यात्म, आयुर्वेद में आत्मनिर्भरता और उच्च विचारधारा वाला जीवन। यह जनसंघ की विचारधारा में पली हमारी वर्तमान सरकार का मूल है कि हर व्यक्ति को आधारभूत स्तर पर भोजन, घर और कपड़ा, शौच और स्वास्थ्य, कर्मशील जीवन शैली मिले तभी भारत के प्रधानमंत्री स्वयं भी इन नियमों का पालन करते हैं। वो 18 घंटे काम करते हैं। स्वस्थ जीवन शैली का पालन करते हैं। योग व्यायाम प्राणायाम शुद्ध भोजन और उच्च विचार के लिए अध्ययनरत रहते हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की चाह

2015 में उन्होंने योग अपनाओ और 2020 में आयुर्वेद अपनाओ जैसे नारे दिए हैं। स्वयं के जीवन को उदाहरण रूप में प्रस्तुत भी किया है। हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ शरीर जो मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर समग्र विकास का द्योतक है। 21वीं सदी में दुनियाभर के विकसित और विकाशील देशों की विकास और विज्ञान की गति को कोविड-19 ने रोक दिया। इससे पहले दुनिया भर में वायरस और जीवाणु जनित रोगों पर ज्यादातर सरकारें रिसर्च कराती थीं लेकिन कोविड-19 ने हर देश और राष्ट्र, राज्य को प्रभावित किया है और व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता और महत्वपूर्ण अंगों पर हमला करके सबको मृत्यु के भय से आक्रांत कर दिया है। ऐसे समय में भारत सरकार ने अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था और उसके आधारभूत पक्षों की कमियों पर गहराई से विचार किया और पुरानी योजनाओं को तीव्रता से परिवर्तित करके प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना को लागू किया। वित्तीय वर्ष 2021-2022 में इसे लागू किया गया है। यह सरकार की 6 वर्षीय कार्यरूप योजना है। इसका लक्ष्य भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और विकसित करना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा को एकीकृत करके सबके लिए समान स्वास्थ व्यवस्था स्थापित करना है ताकि भारत कोविड 19 जैसे अनेक विषाणु जनितरोग और समस्या से लड़ने को हरदम तैयार हो।

समग्र नजरिया जरूरी

इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत भर के स्वस्थ से जुड़े प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्तर के सभी संस्थानों को आत्मनिर्भर बनाना है। सूचना तकनीक के प्रयोग से सभी स्थानीय, ब्लॉक, प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालों को आपस में जोड़ना है ताकि किसी भी आपदा का सामना किया जा सके। इस योजना के लिए भारतीय जनता सरकार के प्रति आभारी होगी। बात जब स्वास्थ्य की होती है तब उसको समग्रता में देखा जाता है। भारतीय शास्त्र और निदान पद्धति आयुर्वेद इसे ऐसे ही देखता है। वहीं आधुनिक युग में स्वास्थ्य के मायने विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1948 में परिभाषित किया था। डब्ल्यूएचओ मानता है कि किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ होने की स्थिति को ‘स्वास्थ्य’ कहा जाता है।

मानवता के लिए काम

कहने का तात्पर्य यही है कि स्वास्थ्य मानव जीवन की समग्र स्थिति का नाम है जिसमें किसी व्यक्ति का शरीर, मन और सामाजिक परिस्थिति के प्रति नजरिया स्वास्थ्य होना चाहिए। ऐसा ही कुछ आयुर्वेद पद्धति ने हमेशा बताया है जबकि आधुनिक एलोपैथ उपचार पद्धति दवा और रोग निदान विज्ञान केवल मानव शरीर के अंगों का विश्लेषण करने और उससे जुड़ी बीमारी का निदान खोजने में परेशान रहा है। उसके पास आयुर्वेद जैसी जीवन शैली और वनस्पति आधारित दावा और भस्म पद्धति का ज्ञान नहीं है लेकिन आयुर्वेद विधा का सहयोग जरूर है। जबकि यहाँ मुख्य समस्या साथ मिलकर मानवता के लिए काम करने की है।

यूपी : स्वास्थ्य क्षेत्र में काम

आज हम लोग हमारे ‘छोटे भारत’ में स्वास्थ्य व्यवस्था और उसकी दशा और दिशा पर थोड़ा ध्यान देंगे। अभी 2022 का विधानसभा चुनाव गुजरा है। उत्तरप्रदेश में पुनः योगी आदित्य नाथ मुख्यमंत्री पद पर आरूढ़ हुए हैं। बीते 5 साल यूपी में योगी जी और उनकी टीम ने बहुत काम किया। योगी जी की सरकार ने यूपी की जनता के सेहत और स्वास्थ्य के लिए क्या किया, पहले यह जानते हैं।

योगी 1.0 के काम

1.2019 में जन आरोग्य योजना का आरंभ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री ने किया। इस योजना के तहत 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा योजना कवर हर नागरिक को दिया जाना तय हुआ। यह योजना प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा आरंभ जन आरोग्य योजना का प्रादेशिक रूप है। इस योजना में उन लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें प्रधानमंत्री आरोग्य योजना में मौका नहीं मिल सका था। इस योजना द्वारा 10 करोड़ परिवार को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया। इस बीमा योजना में लाभार्थी परिवार को गोल्डन कार्ड मिलता है जिसके लिए लाभार्थी परिवार को 30 रुपये देने होते हैं। इस बीमा योजना में शामिल परिवार के लोग किसी भी अस्पताल में मुफ्त इलाज करा सकेंगे और उनके इलाज पर जो बिल बनेगा, उसका भुगतान राज्य सरकार करेगी। योजना के स्तर पर यह बहुत सार्थक पहल है। लेकिन इसका फायदा सही लोगों को मिल रहा और वो 10 करोड़ परिवार इस जन आरोग्य योजना से लाभान्वित हुए की नहीं, यह आकलन का विषय है।
2. इस योजना में उस वर्ग को शामिल किया गया है जिस पर आज तक किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। जन आरोग्य योजना में पत्रकारों को शामिल किया गया है। उनकी सूचना मांगी गई है। पत्रकार और उसके परिवार के उपचार के लिए यूपी सरकार ने कैशलेस बीमा योजना चालू किया है। देखने वाली बात यह है की इससे कितने स्थानीय और जिला स्तर के पत्रकार और उनका परिवार लाभान्वित होता है। यह एक कारगर पहल है। यह योजना असंगठित क्षेत्रों के कामगारों और उनके परिवार को संरक्षण देगी। इस योजना से जुडने के लिए आवेदन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों स्तर पर मौजूद है। इस योजना से मिले कार्ड का उपयोग स्टेट एजेंसी फॉर कॉमप्रीहेनसिव हेल्थ और इंटीग्रेटेड सेवा से जुड़े सरकारी और निजी अस्पताल में हो सकेगा।
3. इस योजना में 40 लाख अंत्योदय कार्ड धारक भी शामिल किये जाएंगे। इसकी जानकारी जुलाई 2021 में योगी सरकार के राज्य सरकार और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दी थी। मूलतः मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का मुख्य मकसद उन लोगों को बीमा योजना में शामिल करने का है जो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल नहीं हो सके थे। इस योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी को ही मिलेगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबधित हैं। अगस्त 2020 में मुख्यमंत्री योगी ने यूपी के 11 जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को शुरू किया था जिसमें एक साल के नवजात से लेकर 19 वर्ष तक के युवा को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल 99 लाख युवक और युवतियों को कृमि मुक्ति के लिए दवा देने की योजना बनाई गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तीन योजना शुरू की गई है। पहली राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान जिसमें चार चरण में 10 करोड़ बच्चों को 400 मिली ग्राम एलबेंडाजोल नाम की चबाने वाली गोली दी जाएगी। इसके अलावा पीसीवी न्यूमोकोकल कॉनजुयगेट वैक्सीन की भी शुरुआत की गई। इस टीकाकरण में निमोनिया और मस्तिष्क ज्वर से बढ़ रही शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए प्रयास तेज किया जा रहा है। 75 जनपदों में यह योजना शुरू की जाएगी। विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए भी समग्र कार्यक्रम चलाया गया है जिसमें रोग से लड़ने वाली क्षमता और रतौंधी जैसी बीमारी से नवजात और 5 वर्ष के बच्चों को बचाने के लिए विटामिन ए की दवा पिलाई गई। 2.5 करोड़ बच्चों को दवा पिलाई जानी थी। वही सवाल फिर उठेगा कि केवल जननी और उसके बच्चे तक ही महिला के स्वास्थ्य को सीमित क्यूँ कर दिया गया है। महिला का भी अपना जीवन है। उस पर भी जिम्मेदारी है परिवार की, समाज की और राष्ट्र के विकास की। महिला की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार की योजनाएं कम व्यापक नजर आती हैं। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना हो या मिशन शक्ति, यह अच्छी योजना हो सकती है लेकिन महिला के समग्र विकास के लिए उसे भी एक साधारण व्यक्ति जैसा समझना और विकास का अवसर देना और सशक्त बनाने के लिए योजना लागू करना, योजना के हर स्तर पर अनुपालन कराना भी सरकारी योजना का हिस्सा होना चाहिए। सामाजिक ऑडिट योजना को हर सरकारी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि कोई भी योजना लाभार्थी को लाभ दे रही या नहीं, इसका पता लगाया जा सके।

कई लाभकारी योजनाओं की शुरुआत

बीते पाँच साल में योगी सरकार ने यूपी को मानव जीवन के लिए बेहतर राज्य बनाने के लिए और विकास की गति बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की। स्वास्थ्य को उत्तम और प्रदेश की जनता को निरोगी जीवन देने के लिए भी सरकार ने निम्न योजनाओं को आरंभ किया। जैसे यूपी के 59 जनपदों में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज क्रियाशील हो, लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्व विद्यालय का निर्माण शुरू किया गया। 16 जनपदों में पीपीपी मॉडल वाले मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए काम शुरू किया गया। रायबरेली और गोरखपुर में एम्स को जनता के लिए खोला गया। पीएम जन आरोग्य योजना में 6 करोड़ 47 लाख लोगों को निशुल्क और कैशलेस बीमा योजना से जोड़ने का कार्य शुरू किया गया। 42 लाख लोगों को जन आरोग्य योजना से जोड़ा गया। 6 नए सुपर स्पैशलिटी मेडिकल ब्लॉक की स्थापना की गई। भदोही और गोरखपुर में वेटनेरी यानि जानवर के रोग का निदान करने वाले चिकित्सा विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू किया गया। पूरे यूपी में 4475 एंबुलेंस आपात स्थिति के लिए शुरू की गई। 9512 चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती की गई। महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति, विधवा पेंशन स्कीम, मुख्य मंत्री कन्या सुमंगल योजना, स्वयंसेवी महिला समूह, सखी योजना, जननी और शिशु जीवन रक्षा के लिए भी योजनाओं को लागू किया गया है।

कोविड-19 ने सबको सतर्क किया

लेकिन इन सभी कार्यरत योजना और उनसे यूपी की जनता को मिलने वाला लाभ जानने के लिए इनके पूर्ण होने की प्रतीक्षा करनी होगी। यह जानने से पहले इस ओर एक बार ध्यान देना जरूरी है कि कोरोना महामारी से जूझने के लिए कोई भी देश और सरकार तैयार नहीं थी। लेकिन भारत सरकार ने अपनी जनता को सुरक्षा रक्षा देने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए थे। यह महामारी दुनिया भर की सरकारों और प्रशासन को यह बताने के लिए आई थी कि उनकी योजनाएं कितनी कारगर हैं। पहली और दूसरी कोविड लहर में मची तबाही और जनता में फैले भय से सरकार भी समझ गई है कि बीमा योजना और सरकारी और निजी अस्पताल की संख्या बढ़ाने से जनता की समस्या कम नहीं होगी। कोविड ने उन देशों में भी संहार किया जहां की स्वास्थ्य व्यवस्था उत्तम थी। इस मायने में भारत को बहुत अधिक नुकसान दूसरी लहर में हुआ जब लोग अपनों को खो रहे थे। पैसा और दवा होने पर भी हॉस्पिटल में बेड नहीं मिलना और प्राथमिक चिकित्सालय और जिला चिकित्सालय या प्रादेशिक चिकित्सालय की अव्यवस्था आदि का पता चला। प्राणवायु खरीदने-बेचने का कुचक्र रचा गया। यह सब हुआ भय और कोविड की संक्रमकता को नजर अंदाज करने के कारण। खैर, यह एक आपदा थी जिसने दुनिया के साथ भारत की जनता और सरकार सबको आगाह किया कि बीमा कवर और सुपर स्पैशलिटी ढांचा भी जीवन बचाने के काम नहीं आएगा। जब वायरस बुद्धिमान होगा और उसमें शरीर दर शरीर अपनी खूबी बढ़ाने की योग्यता होगी। यह सब आने वाले समय में कई बार होगा अगर जनता का अपने स्वास्थ्य के प्रति नजरिया सजग नहीं होगा। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण कोरोना दुनिया पर हावी हो सका। अगर स्वास्थ्य का मतलब केवल शरीर को तगड़ा रखने तक सीमित होगा तो यही होगा। समय के साथ बीमारी और उसके लक्षण भयावह होंगे, लेकिन भोली भाली जनता न्यू नॉर्मल और जीवन के पुनः उसी राह पर आने को परेशान हो तो सरकार के प्रयास कितने भी उच्च स्तर के क्यों न हो, उसमें कामयाबी पाना मुश्किल ही रहेगा। इसकी वजह जनता में जागरूकता की कमी है इसलिए न ही किसी सरकारी योजना के प्रति और न ही स्वास्थ्य के प्रति सचेत है। चाहे यूपी सरकार हो, चाहे राष्ट्रीय सरकार हो। सारी योजना में प्रशासन और जनता का रवैया उसका दुश्मन बन जाता है।

समाज को पहल करनी होगी

योगी सरकार ने न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के स्तर पर बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी कई योजनाएं लागू की हैं। महिला समाज और यूपी में गर्भवती महिला और उसके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भोजन, दवा और टीकाकरण की कई निशुल्क सुविधा दी जा रही है। लेकिन जब तक समाज और सरकार मिलकर काम नहीं करेंगे तब तक उत्तर प्रदेश हो या भारत का स्वास्थ्य तंत्र हो, इनका आत्मनिर्भर होना नामुमकिन होगा। राज्य या केन्द्र सरकार, कोई भी योजना जब लागू करती है उसमें कार्यबल, योजना बनाना, धनबल और क्रियान्वयन में प्रशासन तंत्र आदि का उपयोग होता है लेकिन योजना के प्रभाव का अध्ययन करने वाला कोई सरकारी और योग्य तंत्र नहीं है। इस कारण योजना से कुछ को लाभ मिलता है, कुछ को नहीं। बहुत बार ऐसा होता है कि जिस वर्ग के लिए योजना लागू होती है, उसके बजाय अन्य लोग इसका लाभ ले जाते हैं। यह सब व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कारण होता है। भारत में स्वास्थ्य का मानक वही है कि व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से संतुष्ट और प्रसन्न हो। भोजन, पानी, कपड़ा, घर, शौच के लिए स्थान यह आधारभूत मानव जीवन की आवश्यकता है। लेकिन यह स्वस्थ जीवन और समाज का उदाहरण नहीं है। हर स्तर पर सरकार अपना काम कर रही है लेकिन प्रशासन तंत्र और समाज की उचित भागीदारी के बिना हर योजना अधूरी है। अगर व्यक्ति स्वस्थ नहीं महसूस करेगा तो वो समाज और सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं ले सकेगा। जीवन में स्वास्थ्य से जुड़े पक्ष को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी जितनी सरकार की है, उतनी ही जनता की भी। वो कैसे माहौल में जीवन जीने की इच्छा रखते हैं। भ्रष्ट और अव्यवस्था वाले समाज और राज्य में या फिर स्वच्छ, साफ और सुनियोजित समाज में आधारभूत ढांचे में आत्मनिर्भर और स्वास्थ्य जीवन का निर्वहन करना चाहते हैं।

नकारात्मक माहौल न बने

अक्सर बाजार कहता है कि जिस चीज की डिमान्ड ज्यादा होती है, उसकी सप्लाइ के लिए उत्पादक उतनी मेहनत करता है। अगर वो सुविधा उपलबद्ध नहीं या कम संख्या में है, तो उसका दाम बड़ा दिया जाता है। लेकिन यह बाजार और इसके नियम कौन बनता है? बाजार खुद ही बनाता है। कहने का मतलब यह कि राज्य और देश आपका है। संसाधन आपके हैं। सरकार भी आपकी है। समाज भी आपका है। जीवन भी आपका है। इससे बेहतर और बृहत बनाने का अधिकार भी आपका ही है। आंकड़ों में जाएंगे कि कौन सी योजना सफल रही?, कौन सी असफल रही?, उससे केवल नकारात्मक माहौल बनेगा। सही सोच से एकजुट होकर हर सही योजना और कार्य को समर्थन देने से सरकार का मनोबल बढ़ेगा। आपने ही चुनकर उसे सत्ता दी है। जरूरत है जागरूक नागरिक समाज और नागरिक की जो अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी खुद ले। एक व्यक्ति आत्मनिर्भर होगा, उसका परिवार आत्मनिर्भर होगा, ऐसे ही समाज आत्मनिर्भर होगा और इसी तरह एक स्वास्थ्य और सजग और कार्यशील समाज से बेहतर राष्ट्र का निर्माण होगा। सपने हमेशा बड़े होने चाहिए लेकिन उनकी शुरुआत प्राथमिक इकाई से होती है। यूपी, बिहार, गोवा, पंजाब यह इकाई है जिससे भारत बनता है। अगर हर राज्य, हर जिला और हर गाँव अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता की जिम्मेदारी उठा ले। तो सरकार और उसकी योजनाएं वो कुंजी है जिससे गाँव का देश भारत स्वास्थ्य और स्वच्छता में आत्मनिर्भर हो जाएगा। इसके लिए बस हर व्यक्ति को पहल करनी होगी।

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