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सरकारी योजनाओं में अब मिलेगा फोर्टिफाइड चावल

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गत दिनों राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS), समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस), प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण-पीएम पोषण ख्पूर्ववर्ती मध्याह्न भोजन योजना (MDM) और भारत सरकार की अन्य कल्याण योजनाओं (OWS) में 2024 तक चरणबद्ध रूप से फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। चावल के फोर्टिफिकेशन की पूरी लागत (लगभग 2,700 करोड़ रुपये प्रति वर्ष) जून, 2024 तक इसके पूर्ण कार्यान्वयन होने तक खाद्य सब्सिडी के हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी।

तीन चरणें में कार्यान्वयन

इस पहल के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित तीन चरणों की परिकल्पना की गई हैः
चरण-1: मार्च, 2022 तक पूरे भारत में आईसीडीएस और पीएम पोषण को कवर करना जो कार्यान्वयन के अधीन है। चरण-2: उपर्युक्त चरण के साथ-साथ मार्च 2023 तक सभी आकांक्षी और स्टंटिंग की समस्या से व्यापक रूप से प्रभावित जिलों (कुल 291 जिलों) में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) और अन्य कल्याण योजनाएं (OWS)। चरण-3 : उपर्युक्त चरण के साथ-साथ मार्च 2024 तक देश के शेष जिलों को कवर करना। कार्यान्वयन के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग राज्य सरकार-केंद्रशासित प्रदेश, संबद्ध मंत्रालयों-विभाग, डेवलपमेंट पार्टनर्स, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों आदि जैसे सभी संबंधित हितधारकों के साथ इको-सिस्टम से जुड़ी सभी गतिविधियों का समन्वय कर रहा है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य की एजेंसियां पहले से ही फोर्टिफाइड चावल की खरीद में लगे हुए हैं और अब तक आपूर्ति एवं वितरण के लिए लगभग 88.65 एलएमटी फोर्टिफाइड चावल की खरीद की जा चुकी है।

कुपोषण से मुक्ति का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में चावल के फोर्टिफिकेशन के बारे में एक घोषणा की थी ताकि देश के हर गरीब व्यक्ति को कुपोषण से मुक्ति और महिलाओं, बच्चों, स्तनपान कराने वाली माताओं आदि में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए पोषण प्रदान किया जा सके जो उनके विकास में बड़ी बाधा है। इससे पहले 2019-20 से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चावल का फोर्टिफिकेशन और इसका वितरण पर केंद्र प्रायोजित प्रायोगिक योजना को तीन साल की अवधि के लिए लागू किया गया था।

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