नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल के केलांग में ICMR सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए एक सुदृढ़़ संस्थागत आधार स्थापित करेगा और हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों की वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाएगा।
हिमालयी क्षेत्र को होगा लाभ
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कम ऑक्सीजन स्तर, अत्यधिक ठंड, बदलते जलवायु हालात और आदिवासी समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को समझने के लिए समर्पित वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करने, उचित उपाय विकसित करने और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए इन क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के व्यवस्थित अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। श्री नड्डा ने कहा कि इस केंद्र की स्थापना सुदूर हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान-आधारित हस्तक्षेप स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने और इन चुनौतीपूर्ण वातावरणों में स्थानीय समुदायों और सेवारत सशस्त्र बलों के कर्मियों के कल्याण को बढ़ाने में सहायक होंगे।
हेल्थ समस्याओं का होगा समाधान
श्री नड्डा ने केंद्र की स्थापना में आईसीएमआर और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के बीच सहयोग की सराहना की। उन्होंने एम्स बिलासपुर के योगदान को भी स्वीकार किया जो इस क्षेत्र में आने वाले रोगियों पर अधिक ऊंचाई की स्थितियों के स्वास्थ्य प्रभावों के अध्ययन में भाग लेगा। यह सहयोग वैज्ञानिक विशेषज्ञता और नैदानिक अनुभव को एक साथ लाएगा ताकि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य चुनौतियों की गहरी समझ विकसित हो सके और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य देखभाल उपायों को समर्थन मिल सके। इस पहल के दीर्घकालिक महत्व पर श्री नड्डा ने कहा कि केंद्र अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों और तैनात सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने में योगदान देगा। किए गए शोध से उचित निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य रणनीतियों के विकास में सहायता मिलेगी, जिससे चरम पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी विशिष्ट चिकित्सा चुनौतियों का समाधान करने और हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। श्री नड्डा ने कोविड-19 वैक्सीन के विकास में आईसीएमआर की भूमिका की भी सराहना की, जिसने न केवल देश में बल्कि दुनिया भर के अन्य देशों में भी महामारी से लड़ने में मदद की।
शोध में शामिल होंगे लोकल लोग
ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने सेंटर के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि केलांग एक ऐसा स्थान होगा जहां प्रयोगशाला और समुदाय का मिलन होगा, जहां स्थानीय लोग अनुसंधान में भागीदार होंगे और जहां लक्ष्य केवल शोध पत्र तैयार करना नहीं बल्कि बेहतर स्वास्थ्य होगा। उन्होंने आईसीएमआर केंद्र के लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा, हिमाचल प्रदेश सरकार और स्थानीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया। शोध के महत्व पर एयर मार्शल संदीप थरेजा, डीजीएफएमएस ने कहा कि सेंटर में किया गया शोध विश्व के कुछ सबसे दुर्गम अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए चिकित्सा देखभाल को सीधे तौर पर सुदृढ़ करेगा। एएफएमएस के जमीनी अनुभव और आईसीएमआर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता के संयोजन से शोध निष्कर्षों को अनुकूलन, शीघ्र निदान और उपचार के लिए व्यावहारिक प्रोटोकॉल में बदलने में मदद मिलेगी।
