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आयुष पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

आयुष पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जोर देकर कहा कि जब पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, सटीक नैदानिक साक्ष्य, गुणवत्ता मानकों और जिम्मेदार एकीकरण का समर्थन मिलता है, तो वे दुनिया भर में निवारक स्वास्थ्य देखभाल सेवा और समग्र कल्याण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। वे दिल्ली में दूसरे भारत-यूके स्वास्थ्य सम्मेलन 2026 का उद्घाटन कर रहे थे जिसका आयोजन मैरेंगो एशिया हॉस्पिटल्स और बीएपीआईओ ट्रेनिंग एकेडमी द्वारा “स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नवाचार को जोड़ना” विषय के तहत किया गया था। दो दिवसीय इस कार्यक्रम ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शिक्षाविदों और संस्थागत प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान किया है।

दो स​र्टिफिकेट कोर्स

आयुष पेशेवरों के लिए एक व्यवस्थित प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण पहल की शुरुआत का स्वागत करते हुए श्री जाधव ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, सटीक नैदानिक प्रमाण, गुणवत्ता मानक और जिम्मेदार एकीकरण पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को निवारक स्वास्थ्य सेवा और समग्र कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बना सकते हैं। इस पहल में आयुष स्नातकों और स्नातकोत्तरों के लिए छह महीने के दो प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शामिल हैं—‘गहन देखभाल और आपातकालीन समर्थन में प्रमाणपत्र’ और ‘जीवनशैली स्वाथ्य तथा सेहत परामर्श और अभ्यास में प्रमाणपत्र’। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य व्यवस्थित शिक्षण और पर्यवेक्षित व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से नैदानिक-सहायता कौशल और निवारक स्वास्थ्य परामर्श को मजबूत करना है।

UK का साथ महत्वपूर्ण

दोनों देशों की पूरक ताकतों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने उल्लेख किया कि नैदानिक शासन, रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन में यूके का अनुभव तथा भारत की नैदानिक विशेषज्ञता, तकनीकी नवाचार और स्वास्थ्य सेवा वितरण क्षमताओं के साथ मिलने से अधिक प्रभावी और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के निर्माण में मदद मिल सकती है। श्री जाधव ने आयोजकों और भाग लेने वाली संस्थाओं को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन चर्चाओं को दोनों देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के लिए स्थायी साझेदारी और ठोस परिणामों में बदल देगा। इस सम्मेलन से भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संस्थागत सहयोग के और मजबूत होने की उम्मीद है, साथ ही इससे स्वास्थ्य सेवा वितरण में ज्ञान के आदान-प्रदान, पेशेवर विकास और नवाचार के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।

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