नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ORS शरीर में पानी की कमी दूर करने से लेकर जान बचाने वाला तक जीवनरक्षक घोल है। इसके लिए एक फॉर्मूला है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तय किया हुआ है जिसमें सोडियम, ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहद जरूरी है। लेकिन बाजार में कई कंपनियां अपने मीठे ड्रिंक्स पर ORS लिखकर बेच रही थीं। FSSAI ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह सब एक डॉक्टर के निरंतर संघर्ष से संभव हो सका है। मालूम हो कि कई फेक ORS में न तो WHO के मानक वाला फॉर्मूला इस्तेमाल होता था, न ही ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करते थे। इसके अलावा इनमें शुगर की मात्रा भी बहुत ज्यादा होती थी, जिसके कारण यह बॉडी के लिए काफी नुकसानदायक होता था। लेकिन पर्याप्त निगरानी के अभाव में कंपनियां ग्राहकों को भ्रमित कर मुनाफा कमा रही थीं।
ORS: आठ साल बाद डॉ. शिवरंजनी को मिली जीत
जानकारी के मुताबिक हैदराबाद की डॉ. शिवरांजनी संतोष ने सोशल मीडिया पर देखा कि कई माता-पिता बच्चों को बाजार का फ्लेवर्ड ORS दे रहे थे, जो असल में ORS था ही नहीं। उन्होंने इसके खिलाफ पहले शिकायतें दर्ज कराया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने 2016 में पहली आधिकारिक शिकायत की, फिर 2022 में तेलंगाना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। उनका कहना था कि ORS कोई आम ड्रिंक नहीं है, यह मेडिकल साइंस से जुड़ा उत्पाद है। इसे गलत तरीके से पेश करना लोगों की जान से खेलना है। कई सालों बाद कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा और FSSAI से जवाब मांगा। कई बार सुनवाई, आदेश और संशोधन के बाद अब FSSAI ने नए निर्देश जारी कर दिए हैं।
ORS: यह है FSSAI का आदेश
अब FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने सभी राज्यों के फूड सेफ्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि कोई भी खाद्य या पेय उत्पाद अब ORS शब्द का उपयोग नहीं कर सकता। केवल वही उत्पाद ORS कहलाएगा जो WHO मानकों के अनुसार हो। ORS सिर्फ मेडिकल ग्रेड प्रोडक्ट की श्रेणी में रहेगा और जो भी इसके नाम पर भ्रामक प्रचार, भ्रामक लेबलिंग करेगा, उस पर केस और दंड होगा। इस आदेश के साथ पहले की वह छूट भी वापस ले ली गई है, जिसमें चेतावनी लिखकर ORS शब्द इस्तेमाल करने की इजाजत मिली थी। इस फैसले के बाद बाजार में बिकने वाले कई फेक ORS अपने आप बंद होंगे। इससे डॉक्टरों का सही ORS इलाज लोगों तक पहुंचेगा। इससे माता-पिता अनजाने में गलत पेय दे कर बच्चों की तबीयत नहीं बिगाड़ेंगे। इसके अलावा ब्रांड्स अब हेल्थ क्लेम करते समय जिम्मेदार होंगे और मेडिकल शब्दों का गलत इस्तेमाल रुकेगा।
वायरल हो रहा डॉ. शिवरंजनी का वीडियो

आदेश आने के बाद डॉ. शिवरंजनी का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे भावुक होकर रो रही हैं और कहती नजर आ रही हैं कि ये मेरे लिए पर्सनल जीत नहीं है, ये भारत के हर बच्चे की जीत है। जो पेय उत्पाद सिर्फ चीनी और कलर थे, वे अब ORS बनकर नहीं बिकेंगे। डॉक्टर के इस वीडियो पर कई बड़े हेल्थ और फूड इंफ्लुएंर्स जैसे-Luke Coutinho, Foodpharmer के नाम से मशहूर हेल्थ एडवोकेट Revant Himatsingka, पीडियाट्रिशन डॉ. पार्थ सोनी, जागरण न्यू मीडिया की हेल्थ एडिटर मेघा ममगेन सहित ने उन्हें लंबी लड़ाई के बाद इस भावुक कर देने वाली जीत की बधाई दी है। यह फैसला स्वास्थ्य सुरक्षा के नजरिए से बेहद अहम है। यह दिखाता है कि अगर कोई डॉक्टर, एक्टिविस्ट या आम नागरिक सही दिशा में अपनी आवाज उठाए और कई बार बड़ी कंपनियों को भी हराया जा सकता है और सिस्टम बदला जा सकता है। अब ORS सिर्फ वही कहलाएगा जो सच में ORS होगा।
जानिए ORS के बारे में
शरीर में पर्याप्त पानी का स्तर बने रहने से शरीर स्वस्थ और फिट रहता है। पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। पानी में सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं। इलेक्ट्रोलाइट वाटर का इस्तेमाल सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। डिहाइड्रेशन, उल्टी या दस्त जैसी समस्या में ORS का घोल या इलेक्ट्रोलाइट वाटर पीने की सलाह भी दी जाती है। इलेक्ट्रोलाइट वाटर को मिनरल वाटर या अल्कलाइन वाटर के नाम से भी जाना जाता है। आजकल इलेक्ट्रोलाइट वाटर का इस्तेमाल चलन में है, लोग इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। एथलीट या एक्सरसाइज करने वाले लोग इसका इस्तेमाल जरूर करते हैं। हमारे शरीर की गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट की जरूरत होती है।
