नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। राज्यसभा में 21 जुलाई को आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य (Health) मंत्रालय ने कई सवालों के उत्तर को सदन में पेश किया। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक प्रश्न पर बताया कि केंद्र सरकार ने देश में आयुष आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है। पर्यटन मंत्रालय स्वास्थ्य पर्यटन के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति और रूपरेखा तैयार की है। भारत को पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु आयुष आधारित चिकित्सा मूल्य यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं जिसमें आयुष वीजा, आयुष गुणवत्ता चिह्न का शुभारंभ आदि कई जरूरी काम हुए हैं।
औषधीय पौधों की खेती
एक अन्य सवाल पर आयुष मंत्री ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) देशभर में औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत औषधीय पादपों की खेती एवं समग्र विकास को बढ़ावा देने हेतु कई तरह से सहायता प्रदान की जाती है। औषधीय पादप उत्पादों के संवर्धन, विपणन एवं व्यापार को प्रोत्साहन देने के साथ किसानों को गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री तथा आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। औषधीय पौधों में मुलेठी, शतावरी, कालीहारी, सफेद मूसली, गुग्गुलु, मंजीष्ठा, कुटकी, अतीस, जटामांसी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, तुलसी, विदारीकंद, पिप्पली, चिरायता, पुष्करमूल आदि के लिए प्रति हेक्टेयर 1.50 लाख की सहायता दी जा रही है।
महामारियों के लिए तैयारी
श्री जाधव ने बताया कि महामारियों का मुकाबला करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों और संस्थानों के माध्यम से उभरती संक्रामक रोगों का पता लगाने और उनसे निपटने की अपनी तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा और सुदृढ़ीकरण करता है। इनमें वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज (वीआरडीएल) नेटवर्क, जीनोमिक निगरानी पहल और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण रोगजनकों का शीघ्र पता लगाने के लिए अपशिष्ट जल निगरानी शामिल हैं। सिमुलेशन अभ्यासों, मॉक ड्रिल और त्वरित प्रकोप प्रतिक्रिया तंत्रों में भागीदारी के माध्यम से तैयारियों को और मजबूत किया जाता है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के माध्यम से एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) लागू कर रहा है, जिसे प्रकोप की आशंका वाले संक्रामक रोगों की निगरानी और प्रतिक्रिया का दायित्व सौंपा गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी वीआरडीएल नेटवर्क का विस्तार 163 प्रयोगशालाओं तक किया गया है, जिसमें 11 क्षेत्रीय VRDL, 27 राज्य वीआरडीएल और 125 मेडिकल कॉलेज वीआरडीएल शामिल हैं, जिससे देश में निदान क्षमता को मजबूत किया जा सके।
कैंसर संस्थान और देखभाल केंद्र
श्री जाधव ने बताया कि कैंसर देखभाल सहित स्वास्थ्य सेवाओं का प्राथमिक दायित्व राज्य सरकारों का है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPNCD) के तहत देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। यह कार्यक्रम गैर-संचारी रोगों के लिए बुनियादी अवसंरचना सुदृढ़ बनाने मानव संसाधन विकास, जांच, शीघ्र निदान, रेफरल, उपचार और स्वास्थ्य संवर्धन पर केंद्रित है। राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत देशभर में 770 जिला गैर-संचारी रोग क्लीनिक, 524 डे केयर कैंसर सेंटर -डीसीसीसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6,410 गैर-संचारी रोग क्लीनिक (एनसीडी क्लीनिक) स्थापित किए गए हैं। कैंसर उपचार सुविधा बेहतर बनाने की योजना के तहत, देश भर में 19 राज्य कैंसर संस्थान और 20 उन्नत देखभाल कैंसर केंद्र स्वीकृत किए गए तो टाटा मेमोरियल सेंटर ने कैंसर इलाज की सुविधा के लिए वाराणसी, विशाखापत्तनम, न्यू चंडीगढ़, गुवाहाटी, संगरूर और मुजफ्फरपुर में छह अस्पताल स्थापित किए हैं।
