स्वस्थ भारत मीडिया
नीचे की कहानी / BOTTOM STORY

खजुराहो संपूर्ण काव्य, मूर्तियों में समाहित गहरे दार्शनिक अर्थ

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। खजुराहो मंदिर परिसर में मौजूद 25 मंदिरों के अवशेष हजारों वर्ष पुराने हये हमें प्राचीन भारत के बारे में उस युग के किसी भी अन्य खंडहरों की तुलना में कहीं अधिक गहरी बातें बताते हैं। लेकिन यह सब उत्तर भारत में सदियों पहले बने ऐसे अद्भुत निर्माणों का अवशेष है। ये खंडहर उस समय के व्यापार, संस्कृति और सामाजिक जीवन के बारे में जानकारी देते हैं। एक कला के रूप में मंदिर की दीवारों पर मूर्तियों में एक पूरा काव्य अंकित किया गया था। ये शानदार मूर्तियां जो हमें हमारे प्राचीन भारतीय दर्शन के बारे में बताती हैं और सीखने के लिए एक खुली किताब हैं।

60 मिनट की हिंदी डॉक्यूमेंट्री

निर्देशक जोड़ी डॉ. दीपिका कोठारी और रामजी ओम की 60 मिनट की हिंदी डॉक्यूमेंट्री ‘खजुराहो आनंद और मुक्ति’ वहां के 25 मंदिरों के खंडहरों का एक दस्तावेज है, जो हजारों वर्ष पुराने हैं। उन्होंने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में एक टेबल वार्ता सत्रों में से एक सत्र को संबोधित किया।

भारतीय कला का एक विश्वकोश

रामजी ओम ने कहा कि उन्हें वैदिक देवताओं की अभिव्यक्तियाँ मिलीं जो सभी 33 कोटि़ हिंदू भगवान मंदिर की दीवारों पर खुदी हुई मूर्तियों में मौजूद हैं। उन्होंने कहा, यह भारतीय कला का एक विश्वकोश है। इस वृत्तचित्र में खजुराहो मंदिर परिसर में वैकुंठ विष्णु मंदिर का पता लगाया गया है। उन्होंने बताया कि कश्मीर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वैकुण्ठ परम्परा अधिक प्रचलित थी। वैकुंठ सिद्धांत से संबंधित विभिन्न दार्शनिक विचारों को मंदिर की दीवारों पर अंकित पाया गया है।

प्रबोध चंद्रदाय से प्रेरित मूर्तियां

उनके मुताबिक मूर्तियां कृष्ण मिश्रा के संस्कृत नाटक ‘प्रबोध चंद्रदाय’ से प्रेरित हैं। इतना ही नहीं, बल्कि मंदिर की दीवारों पर सांख्य दर्शन प्रकट होता पाया गया है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था कि तांत्रिक झंडा नहीं, बल्कि सांख्य का ध्वज खजुराहो के मंदिरों के ऊपर ऊंचा फहराता है। खजुराहो का लक्ष्मण मंदिर, जिसे वैकुंठ विष्णु का निवास माना जाता है, फिल्म में अपने सर्वाेच्च उत्कृष्ट कला रूपों में इन पहलुओं को उजागर करता है।

कामुक नक्काशी के पीछे दार्शनिक रहस्य

डॉ. दीपिका कोठारी ने कहा, खजुराहो के मंदिर कामुक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन कामुक नक्काशी के पीछे दार्शनिक रहस्य छिपे हुए हैं। उन्होंने कहा, यह केवल 10 प्रतिशत है जो खुदा हुआ है और एक गहरा दर्शन बताता है। इस वृत्तचित्र में खजुराहो के लक्ष्मण मंदिर में योग और सांख्य के रहस्यों का अनावरण किया गया है। डॉ. देवांगना देसाई ने वृत्तचित्र के माध्यम से समझाया कि सभी कामुक और गैर-कामुक कल्पना वैदिक और पौराणिक हिंदू संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।

Related posts

उपलब्धियों से भरा रहा IIMC में संजय द्विवेदी का कार्यकाल

admin

जनऔषधि-सस्ती भी, अच्छी भी

admin

बिहार में ड्रग इंस्पेक्टर पर हमला, फूर्सत में नहीं हैं स्वास्थ्य मंत्री

Leave a Comment