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जानिये अपने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। नवगठित केंद्र सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा बनाये गये हैं। राजनीति और मंत्रालय, दोनों के पिच पर इनकी पारी शानदार और उपलब्धिपूर्ण रही है। बिहार से भी उनका पुराना रिश्ता रहा है।

बिहार में हुई शिक्षा-दीक्षा

64 वर्षीय श्री नड्डा ने वकालत से अपनी यात्रा आरंभ की थी और आज 34वें स्वास्थ्य मंत्री की यात्रा तक पहुंचे हैं। उनका जन्म 2 दिसंबर 1960 को पटना, बिहार में नारायण लाल नड्डा और कृष्ण नड्डा के परिवार में हुआ था, जिनकी जड़ें हिमाचल प्रदेश में हैं। उनका एक भाई है जिसका नाम जगत भूषण नड्डा है। उनकी शिक्षा पटना के सेंट जेवियर स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से BA और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से LLB किया। बचपन में उन्होंने दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय जूनियर तैराकी चैंपियनशिप में बिहार का प्रतिनिधित्व किया था। उनका विवाह 11 दिसंबर 1991 को मल्लिका नड्डा से हुई। उनका ससुराली परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी सास जयश्री बनर्जी 1999 में लोकसभा के लिए चुनी गईं थी।

राज्य की राजनीति से सफर का आरंभ

वे पहली बार 1993 में बिलासपुर से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे। 1998 में वे पुनः विधायक बने। उन्होंने 1994 से 1998 तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा में अपने पार्टी के नेता के रूप में कार्य किया। वे पहले धूमल मंत्रालय में 1998 से 2003 तक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और संसदीय मामलों के मंत्री रहे। बाद में 2003 के चुनाव में अपनी सीट हार गए। फिर 2007 के चुनाव में श्री नड्डा एक और कार्यकाल के लिए चुने गए। इस बार धूमल सरकार में वन, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हुए।

राष्ट्रीय राजनीति में उदय

2012 में वे हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। 2014 में कैबिनेट फेरबदल के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको स्वास्थ्य मंत्री का पद दिया। इस पद पर वे 2019 तक रहे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के रूप में उन्होंने 8 जून 2016 को न्यूयॉर्क में एचआईवी-एड्स पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक को भी संबोधित किया। इनके जिम्मे रसायन और उर्वरक मंत्रालय भी रहा। इस बीच 2019 से भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष रहे और 2020 से हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव तक अध्यक्ष के रूप में पार्टी को संभाला। जनवरी 2021 में पश्चिम बंगाल के बर्धमान में उन्होंनेे एक मुट्ठी चावल योजना शुरू की। 2024 में गुजरात से निर्विरोध निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे। वे पार्टी के एक प्रमुख नीति निर्माता रहे। अपने कार्यों से नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी तक का रुतबा हासिल किया। पार्टी के स्तर पर वे भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव भी रहे।

(इस कड़ी में आगे स्वास्थ्य राज्य मंत्रियों के बारे में भी पढें)

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