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दो साल बाद भारत में बनने लगेगी लिथियम-आयन बैटरी

नयी दिल्ली। कम्प्यूटर और मोबाइल फोन के साथ-साथ अन्य उपकरणों में लिथियम आयन बैटरियों का उपयोग एक अनिवार्य आवश्यकता है। इसके लिए भारत को चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से लिथियम आयन बैटरियों का आयात करना पड़ता है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) अब चेन्नई में लिथियम-आयन बैटरी निर्माण सुविधा का निर्माण कर रहा है। इस पहल से लिथियम बैटरियों के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इसके 2024 तक तैयार होने की उम्मीद है जो एक दिन में लगभग 1,000 बैटरी की उत्पादन-क्षमता से लैस होगा।

चेन्नई में होगा स्थापित

तमिलनाडु के कारैकुडी में स्थित CSIR की घटक प्रयोगशाला केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान (CECRI) द्वारा लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण की यह सुविधा तारामणि (चेन्नई) स्थित सीएसआईआर मद्रास कॉम्पलैक्स में स्थापित की जा रही है। CSIR-CECRI इलैक्ट्रोकेमिस्ट्री के क्षेत्र में कार्यरत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्थान है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में उपयोग की जाने वाली ली-आयन बैटरियों की तुलना में इस संयंत्र में निर्मित बैटरियों का जीवनकाल लगभग 5 से 10 गुना अधिक होगा। मौजूदा बैटरियों की तुलना में यहाँ निर्मित होने वाली बैटरियाँ आकार में भी छोटी होंगी।

सामग्री का स्रोत भी भारत में ही

CECRI के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) डॉ के.जे. श्रीराम ने कहा है कि मूल रूप से नई प्रौद्योगिकी होने के कारण, हम इसे उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करना चाहते हैं, ताकि उन्हें इस प्रौद्योगिकी को अपनाने में कोई कठिनाई न हो। वहां के शोधकर्ता ली-आयन बैटरी में उपयोग किए जाने वाले दुर्लभ धातु-तत्त्वों के निष्कर्षण की भी देख-रेख कर रहे हैं। डॉ श्रीराम ने कहा है कि “दक्षिण भारत के हमारे अधिकांश समुद्र तटों में मोनाज़ाइट रेत है, जो दुर्लभ मृदा-धातुओं का एक अच्छा स्रोत है। अपनी विनिर्माण-क्षमता में वृद्धि के लिए हम भारत में ही उसकी सामग्री का स्रोत बनाने में सक्षम होंगे।”

इंडिया साइंस वायर से साभार

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