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Loksabha: दुर्लभ रोग में केंद्रीय सहायता का प्रावधान

Loksabha: दुर्लभ रोग में केंद्रीय सहायता का प्रावधान

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार चिन्हित 63 दुर्लभ रोगों में से किसी भी रोग के उपचार के लिए प्रति रोगी 50 लाख रुपये तक की वित्तीय और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए आवश्यक कई दवाएं महंगी हैं क्योंकि इन्हें देश के बाहर से आयात किया जाता है। दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021 (एनपीआरडी, 2021) के अंतर्गत 15 नामित उत्कृष्टता केंद्रों ने इन रोगों की पहचान की है। यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि औषधियों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी 2011 में दी गई थी। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के उपचार में प्रयुक्त एपीआई, रिस्डिप्लाम का निर्माण बायोफोर इंडिया फार्मास्यूटिकल्स द्वारा इसी योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इसके अलावा, नैटको फार्मा ने इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारतीय बाजार में जारी किया है और इसका उत्पादन घरेलू स्तर पर कर रही है।

लोकसभा: नकली दवा पर एक्शन

उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि 2023 में मानव उपयोग के लिए 14 और पशुओं के उपयोग के लिए 02 दवाएँ, 2024 में मानव उपयोग के लिए 157 और पशु उपयोग के लिए 01 दवा तथा 2025 में 1 मानव उपयोग के लिए और 36 पशुओं के उपयोग के लिए दवाएँ अमानक मिलीं। CDSCO एवं राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकार दवा के नमूने परीक्षण हेतु लेते हैं। केंद्रीय प्रयोगशाला द्वारा मानक गुणवत्ता विहीन, नकली, मिलावटी पाए गए सभी नमूनों की रिपोर्ट CDSCO की वेबसाइट पर अलर्ट के रूप में सार्वजनिक की जाती है। ऐसे मामलों में लेबल दावा अनुसार निर्माताओं को दवाओं को वापस मंगाने का निर्देश दिया जाता है। कानून के मुताबिक दूसरी दवा के नाम से निर्मित, धोखा देने वाली नकल, गलत निर्माता नाम, गैर-मौजूद निर्माता दावा आदि दवा नकली मानी जाती है। ऐसी दवाओं से मृत्यु पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास (न्यूनतम 10 लाख या जब्त दवा मूल्य का 3 गुना जुर्माना), अन्य मामलों में 7 वर्ष से आजीवन कारावास (न्यूनतम 3 लाख या 3 गुना जुर्माना) का प्रावधान है।

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