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अब दवा निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

अजय वर्मा

नयी दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे को लोग राजनीतिक दौरा मानकर रह जाते हैं लेकिन वो इस दौरान देष की आत्मनिर्भरता के मकसद को भी पूरा करते चलते हैं। अभी हिमाचल दौरे में यही हुआ जब ऊना में उन्होंने बल्क ड्रग पार्क (Bulk Drug Park) की नींव रखी और बता दिया कि भारत अब दवा निर्माण में काम आने वाले छोटी-छोटी चीज यानी एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स इनग्रीडिएंट्स (API) के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहेगा। इससे पहले गुजरात में भरूच जिले के जंबूसर में ऐसे पार्क की नींव रखी थी। तीसरा आंध्र प्रदेश में होगा।

तीन हजार करोड़ खर्च होंगे

दरअसल दवानिर्माण में देश आत्मनिर्भर बनना चाहता है ताकि घरेलू दवा बाजार में न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़े बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप से दवा बनाने और उसके उत्पादन के मामले में भी शीर्ष पर रहे। दवाओं के निर्माण में जिन तत्वों यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट्स की जरूरत होती है वह चीन से आता रहा है। तीन bilk drug park को विकसित करने में तीन हजार करोड़ की लागत लगनी है। नीति आयोग की देखरेख में यह सब हो रहा है।

अभी 35 तरह के API देश में बनेंगे

बल्क ड्रग पार्क में ही दवाइयों को तैयार करने में उपयोग होने वाले तरह-तरह के तत्वों यानी एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स इनग्रीडिएंट्स को बनाया जाएगा। इस मामले में चीन पर निर्भरता कुल 53 प्रकार के API के लिए थी। अब 35 तरह के API को देश में ही निर्मित किया जाना है। सरकार ने तय किया है कि बचे हुए 18 API के साथ हर एक API को यहीं निर्मित किया जाए। दवा उत्पाद का सबसे प्रमुख घटक उसका कच्चा माल होता है। कोविड के दौरान चीन और अमेरिका पर निर्भरता भारत को मुश्किल हो रही थी। चीन दुनिया के API उत्पादन और निर्यात का लगभग 20 फीसद हिस्सा नियंत्रित करता है।

PLI Scheme से उत्पादन शुरू

जानकारी के अनुसार प्रोत्साहन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI Sscheme) के तहत 35 एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स इनग्रीडिएंट्स का देश में ही उत्पादन शुरू कर दिया गया। इन सभी के लिए भारत 90 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर रहा है। सरकार ने एक बार लोकसभा में जानकारी दी थी कि भारतीय दवा कंपनियों ने 2018-19 में दवा निर्माण के लिए 240 करोड़ डॉलर का आवश्यक API को चीन से मंगाया। 76 प्रतिशत तत्व भारत ने अकेले चीन से ही आयात किया जिसमें से 90 प्रतिशत की खपत भारत में उपयोग में लायी जाने वाली दवाइयों में होती थीं।

रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे

तीन बल्क ड्रग पार्कों के बन जाने से जीविका के अवसर भी मिलेंगे। हिमाचल प्रदेश में 50 हजार, आंध्र प्रदेश में 60 हजार और गुजरात में 40 हजार से अधिक लोगों के लिए उनकी जीविका का रास्ता खुलेगा। 2021 में सरकार ने फार्मा उद्योग के लिए PLI योजना शुरू की थी जो 15,000 करोड़ की थी जिसके तहत प्रोत्साहन के पात्र चिह्नित 55 कंपनियों में सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब के साथ ही ल्यूपिन, सिप्ला और कैडिला हेल्थकेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं।

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