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संसद : तीन साल में 9 हजार दवाएं घटिया क्वालिटी की निकली

संसद : तीन साल में 9 हजार दवाएं घटिया क्वालिटी की निकलीं

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। पिछले तीन सालों में 9,000 से ज्यादा दवाएं घटिया क्वॉलिटी की मिली हैं। इसके लिए तीन लाख से ज्यादा सैंपल टेस्ट किए गए। इसमें कुछ नकली— मिलावटी भी। बाकी गुणवत्ता टेस्ट में फेल हो गई। राज्यसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि दिसंबर 2022 से दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों की निरीक्षण प्रणाली शुरू की गई है। यह बताया गया कि अब तक 905 दवा निर्माण इकाइयों की जांच की गई, जिनमें से 694 मामलों में कार्रवाई हुई। उनमें स्टॉप प्रोडक्शन ऑर्डर, लाइसेंस रद्द करना शामिल है।

भारत ने बनाई पारंपरिक इलाज की AI लाइब्रेरी

भारत इलाज की पारंपरिक तरीकों को डिजिटल रूप देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इसने प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को किताबों और पांडुलिपियों के अलावा एक एडवांस AI आधारित प्लेटफॉर्म में सेव किया गया है। इसका नाम ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी यानी TKDL। इसका मकसद पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, वैश्विक स्वास्थ्य के लिए काम का बनाना और बायोपायरेसी से सुरक्षित रखना है। इस काम के लिए भारत की WHO ने भी सराहना की है।

पीने के पानी में फ्लोराइड का समाधान

जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरों में नल से जल आपूर्ति हेतु योजनाएं बनाते समय फ्लोराइड सहित रासायनिक प्रदूषकों से प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता दी जाती है। जल संसाधन मंत्री वी. सोमन्ना ने राज्यसभा में बताया कि मिशन के आरंभ के बाद से फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों की संख्या में कमी आई है। 2019 में इसकी संख्या 7,996 थी तो अभी घटकर 248 हो गयी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार फ्लोरोसिस की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCF) लागू कर रही है। इसे 163 जिलों में लागू किया जा रहा है और इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगस्त 2019 में यह मिशन (जेजेएम) शुरू की थी, जिसका लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्‍मक घरेलू नल कनेक्शन देना है। इसे अब 2028 तक विस्तार देने का प्रस्ताव है। अब तक 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में से 15.67 करोड़ (80.95 प्रतिशत) से अधिक घरों में नल के पानी की आपूर्ति होने की सूचना है।

10.18 करोड़ महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर जांच

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि अब तक 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र की 10.18 करोड़ महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच पूरी की जा चुकी है। यह काम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAMs) के माध्यम से किया गया है। यह पहल गैर-संचारी रोगों (NCDs) की समय पर पहचान, रोकथाम और प्रबंधन के उद्देश्य से शुरू की गई थी। यह मिशन की बड़ी सफलता है। इस जांच में मुख्य रूप से विजुअल इंस्पेक्शन विथ एसीटिक एसिड (VIA) तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह जांच प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा सब-हेल्थ सेंटर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में की जाती है। VIA पॉजिटिव पाए गए मामलों को आगे की जांच के लिए उच्च केंद्रों पर भेजा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता इस कार्यक्रम की रीढ़ हैं। वे महिलाओं को समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक भी करती हैं।

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