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तंबाकू सेवन से वॉइस बॉक्स के कैंसर की संभावना

तंबाकू सेवन से वॉइस बॉक्स के कैंसर की संभावना

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। देखा जाए तो तंबाकू चबाने और सिगरेट पीने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। प्रचार साधनों से ऐसी चीजों का प्रसार भी हो रहा है। ये चीजें बाद में चलकर आवाज और गले के अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे वॉइस बॉक्स यानी स्वरयंत्र (Larynx) का कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है जो धीरे-धीरे बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है।

जानिए स्वरयंत्र को

एक्सपर्ट बताते हैं कि गले में मौजूद स्वरयंत्र बोलने में मदद करता है। यह गले के बीच में होता है। यह वॉइस बॉक्स हवा की नली (टर्किया) और गले के बीच में होता है। बोलने पर हवा वोकल कॉर्ड्स से गुजरती है और एक तरह कंपन पैदा होता है, इसी कंपन के कारण आवाज बनती है। यदि इस हिस्से में कैंसर शुरु हो जाए तो व्यक्ति को बोलने, आहार को निगलने और कुछ मामलों में सांस लेने में भी पेरशानी होती सकती है। तंबाकू में निकोटिन, टार और कई अन्य कैंसर का कारण बनने वाले कैमिकल्स होते हैं। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तंबाकू खाता या चबाता है, तो ये कैमिकल्स गले की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनमें बदलाव ला सकते हैं। ऐसे में कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले सकती हैं। सिगरेट पीना और तंबाकू चबाना वॉइस बॉक्स के कैंसर का एक मुख्य कारण माना जाता है।

वॉयस बॉक्स कैंसर के प्रमुख कारण

  • तंबाकू का सेवन
  • तंबाकू के साथ शराब का सेवन तो खतरा काफी
  • कैमिकल्स के महौल में ज्यादा समय देना
  • परिवार में किसी को कैंसर होना
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का इंफेक्शन होना

वॉइस बॉक्स कैंसर के लक्षण

  • आवाज में बदलाव
  • आवाज में भारीपन आना
  • गले में सूजन या गांठ का बनना
  • बोलने में परेशानी होना
  • भोजन को निगलने में परेशानी होना आदि।

वॉइस बॉक्स कैंसर का इलाज

वॉइस बॉक्स कैंसर की पहचान के लिए डॉक्टर लैरिंगोस्कोपी (Laryngoscopy), बायोप्सी, सीटी स्कैन, एमआरआई, ब्लड टेस्ट और एक्स रे करने की सलाह देते हैं। इसके बाद रोग की गंभीरता को देखकर इलाज शुरु किया जाता है। इसमें कैंसर की स्टेज को भी ध्यान में रखा जाता है। इसका इलाज इन तरीकों से किया जाता है—
सर्जरी-शुरुआती स्टेज में ट्यूमर को हटाने के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। अगर ट्यूमर बड़ा हो गया है, तो लैरिंजेक्टॉमी (स्वरयंत्र को निकालना) करना पड़ सकता है।
रेडिएशन थेरेपी-कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किरणों का प्रयोग किया जाता है। सर्जरी के पहले या बाद में दिया जा सकता है।
कीमोथेरेपी-दवाओं द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। रेडिएशन के साथ मिलकर असरकारक साबित हो सकती है।
पुनर्वास—बोलने की क्षमता लौटाने के लिए स्पीच थेरेपी को भी अपनाया जाता है। वॉइस बॉक्स हटाने पर आर्टिफिशियल वॉइस बॉक्स या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद ली जाती है।

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