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आ गया सर्वे: जानिये सब कुछ मेंस्ट्रुअल हाइजीन के बारे में

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। नींद में खलल, मासिक धर्म में ऐंठन और गंदे सार्वजनिक शौचालय….ऐवरटीन के वार्षिक मेंस्ट्रुअल हाइजीन सर्वे-2022 के मुताबिक भारतीय महिलाओं के लिए ये तीनों मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। सर्वे के मुताबिक माहवारी शुरु होने की उम्र और पीरियड्स की अवधि में काफी परिवर्तन हो रहे हैं। भारत के जानेमाने नारी हाइजीन ब्रांड ऐेवरटीन ने अपने सालाना मेंस्ट्रुअल हाइजीन सर्वे 2022 में सामने आए तथ्यों को जारी किया है। यह सर्वे 28 मई को मनाए जाने वाले वैश्विक मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर हर साल किया जाता है।

पहले दो दिन कठिन

सर्वे में दिल्ली, मुंबई, बंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई, पटना, अहमदाबाद, भोपाल, गुवाहाटी, जयपुर, अमृतसर व कोलकाता समेत देश के 35 से अधिक शहरों की लगभग 6000 महिलाओं से हिस्सा लिया जिनकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच है। रिपोर्ट के मुताबिक आधे से ज्यादा महिलाएं (53.2 प्रतिशत) अपने पीरियड्स के पहले दो दिनों में वे ठीक से सो नहीं पाती हैं। 67.5 प्रतिशत को रात भर दाग पड़ने की चिंता रहती है। 57.3 प्रतिशत को ऐंठन का अनुभव होता है, जबकि 37.2 प्रतिशत को हल्का दर्द भी। 62.2 प्रतिशत ने दफ्तर, मॉल या सिनेमा हॉल के टॉयलेट में सैनिटरी पैड कभी नहीं या शायद ही कभी बदला है। ऐसी नौबत आने पर भी 74.6 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी पैड बदलने में असहज अनुभव करती हैं। 88.3 प्रतिशत मानती है कि गंदे टॉयलेट यूटीआई का स्त्रोत हो सकते हैं।

पहले पीरियड की उम्र में कमी

सर्वे में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जो माहवारी शुरु होने की उम्र और पीरियड्स की अवधि के बारे में हैं। अधिकांश (79.3 प्रतिशत) को 12 वर्ष या उससे अधिक की उम्र में पहला पीरियड हुुआ था। 37.5 प्रतिशत लड़कियों को तो 11 वर्ष या इससे कम में माहवारी हुई। लड़कियों को 8 वर्ष (3.2 प्रतिशत) और 9 वर्ष (4.8 प्रतिशत) की नाजुक उम्र में भी पहला मासिक धर्म हुआ।

69.7 फीसद को भारी प्रवाह

सर्वे में यह भी पाया गया कि एक-तिहाई (69.7 प्रतिशत) ने पीरियड्स के दौरान मध्यम से भारी प्रवाह का अनुभव किया है तथा हर तीन घंटे में एक या ज्यादा पैड बदले हैं। 38.9 प्रतिशत अब भी माहवारी के दौरान बाहर जाने से परहेज करती हैं और जो बाहर जाती हैं उनकी सबसे बड़ी चिंताएं होती हैं-सैनिटरी पैड बदलना (32.2 प्रतिशत), माहवारी में ऐंठन (30 प्रतिशत) और दाग पड़ना (28.7 प्रतिशत)। केवल 9 प्रतिशत महिलाओं ने माहवारी की गंध को चिंता का सबब बताया। इस सर्वे ंने ‘वो पांच दिन’ के वाक्यांश पर भी सवाल खड़ा किया है क्योंकि एक तिहाई से भी कम (30.3 प्रतिशत) महिलाओें को 5 दिन की माहवारी होती है। 22.8 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें तीन दिन या उससे कम दिन और 1.8 प्रतिशत महिलाओं की माहवारी हर महीने 8 या उससे ज्यादा दिनों तक चलती है।

जागरूकता बढ़ी महिलाओं में

पैन हैल्थकेयर के सीईओ चिराग पण कहते हैं, “माहवारी की असामान्यताओं के कारण व उनकी सीमा पर गहराई से अन्वेषण करने की आवश्यकता है, विशेषकर पहला पीरियड होने की आयु और मासिक धर्म की अवधि के बारे में। 2021 के सर्वे में 41 प्रतिशत महिलाओं ने कोविड काल में पीरियड्स के बीच अनियमित अंतर के बारे में बताया था जबकि 28.8 प्रतिशत महिलाओें ने ज्यादा क्लॉटिंग की शिकायत की थी। ऐवरटीन के उत्पाद बनाने वाली कंपनी वैट् एंड ड्राई पर्सनल केयर के सीईओ हरिओम त्यागी ने कहा, “सर्वे बताता है कि इस बारे में जागरूकता बढ़ रही है और वर्जनाएं भी टूट रही हैं।

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