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कोविड-19 मन की बात

कोरोना युद्ध हम जरूर जीतेंगे बशर्ते…

डॉ.अनपूर्णा वाजपेयी
डॉ.अनपूर्णा वाजपेयी,वरिष्ठ साहित्यकार, कानपुर

कोरना के कारण जो स्थिति बनी है उससे हम कैसे उबर सकते हैं, इन्हीं बिन्दुओं को रेखांकित करने का काम किया है वरिष्ठ साहित्यकार डॉ .अन्नपूर्णा बाजपेयी ने। पढ़ें उनका यह आलेख और जीवन में उतारने का प्रयास करें।

नई दिल्ली/एसबीएम

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है। चूंकि, यह मौका देश के लोगों के सामने पहली बार आया है,इसलिए इसके बारे में आपका जानना बहुत जरूरी है। इसके बारे में सही जानकारी होने से आपको इससे निपटने में काफी मदद मिलेगी। लॉकडाउन के बारे में पहले से ज्यादा जानकारी नहीं होने से कुछ लोग घबरा रहे हैं। खासकर इसकी कर्फ्यू से तुलना करने पर उनमें डर है। लेकिन, इससे आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है लॉकडाउन

लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो किसी आपदा या महामारी के वक्त लागू की जाती है। जिस इलाके में लॉकडाउन किया गया है उस क्षेत्र के लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। उन्हें सिर्फ दवा और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की खरीदारी के लिए ही बाहर आने की इजाजत मिलती है, इस दौरान वे बैंक से पैसे निकालने भी जा सकते हैं। जिस तरह किसी संस्थान या फैक्ट्री को बंद किया जाता है और वहां तालाबंदी हो जाती है उसी तरह लॉकडाउन का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें। अगर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की परेशानी हो तो आप संबंधित पुलिस थाने, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अथवा अन्य उच्च अधिकारी को फोन कर सकते हैं।

लॉकडाउन जनता की सहूलियत और सुरक्षा के लिए किया जाता है। सभी प्राइवेट और कॉन्ट्रेक्ट वाले दफ्तर बंद रहते हैं, सरकारी दफ्तर जो जरूरी श्रेणी में नहीं आते, वो भी बंद रहते हैं। लॉकडाउन होने पर आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर दूसरी सभी सेवा पर रोक लगा दी जाती है।

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भारत में महाराष्ट्र और राजस्‍थान में सबसे पहले लॉकडाउन किया गया, उसके बाद पंजाब और उत्‍तराखंड में लॉकडाउन करने की घोषणा हुई। फिर प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने देशभर में लॉकडाउन का एलान कर दिया। दिल्ली एवं अन्य राज्यों, शहरों में 20 अप्रैल से लॉकडाउन में मिलने वाली छूट, फ़िलहाल नहीं मिली है।

लॉकडाउन की खिलाफत भी हो रही है

यहाँ बता दें कि लॉकडाउन न किया गया होता तो मेडिकल फ़ैसिलिटीज़ के अभाव में स्थितियां बहुत भयावह होती, जिसकी कल्पना मात्र मन मस्तिष्क को झकझोड़ देता है। इसके पश्चात भी लोग यदि ऐसा कह रहे हैं तो या तो वे महा मूर्ख है या अति विवेकवान। संभवतः वो और हम आज जीवित भी न होते ये कहने और समझाने के लिए।

लॉकडाउन खत्म होने के बाद की स्थिति

क्या हम लोगों को ये समझा पाएंगे कि अब लाइफ यथावत नहीं होने वाली? क्या हम लोगों को ये समझा पाएंगे कि जो अभी तक नियम मानने के लिए हम मजबूर थे उन्हे अभी भी माना जाना जरूरी है? क्या हम लोगों को ये समझा पाएंगे कि कोरोना नामक वायरस अब इतनी जल्दी नहीं खत्म होने वाला? क्या लोग उसी तरह साथ देंगे जैसे अभी तक दिया? क्या लॉक फ्री होते ही लोग की तरह सड़कों पर नहीं उतर आएंगे?

क्या होना चाहिए

कोरोना वायरस के विषय में जान लेने के बाद अब ये जानना भी जरूरी है खास कर उन लोगों को जो यह सोचते है कि शायद लॉकडाउन खुलेगा और वायरस भाग जाएगा और हम अपने पुराने ढर्रे पर आ जायेंगे। तो यहाँ स्पष्ट रूप से कहूँगी कि नहीं ऐसा न करना ही आपके हित में है। पुराने ढर्रे को तो भूल ही जाइए।

अपने पिछले आलेख “भयभीत न हों भयावहता को समझें” में बता चुकी हूं कि अब जो भी होगा बहुत ही अनुशासन में रह कर आपको करना होगा। अन्यथा परिणाम आपको पता है। लाइफ अब यथावत नहीं होने वाली। इन दिनों अब तक जो नियम हमने मजबूरन माने थे अब खुद ही उन्हें मानने के लिए खुद को तैयार करना होगा यदि अपना जीवन चाहिए तो!

ये वाइरस अभी इतनी जल्दी नहीं खत्म होने वाला तो नहीं है। इसकी वैक्सीन आ भी जाती है तो आने बाद भी तुरंत एक दिन में ही सब नियंत्रण में नहीं आ जाएगा। सब कुछ संभव होगा किन्तु धीरे-धीरे! हम वापस लौटेंगे किन्तु समय लेकर! तब तक बहुत अधिक धैर्य रखना होगा। कहते हैं कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। इसलिए सोच विचार कर समझदारी से कदम बाहर निकालिए।

जब आप अपने आप में आश्वस्त हों कि बाहर जा रहे हैं तो बहुत जरूरी है तभी जा रहे हैं और पूरी सुरक्षा के साथ जा रहे हैं। बिना मतलब जाने का अर्थ है संक्रमण को न्योता देना !! ये निश्चित रूप से समझना ही होगा। सार्वजनिक स्थानों पर थूकना भयानक संक्रमण को आमंत्रित करेगा। इसलिए न तो खुद थूकिए और थूकने दीजिये। बड़े-बड़े आयोजनों को जहां तक संभव हो टालिए।

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

7 वर्ष तक के बच्चों को बाहर से आने के बाद न छूयें न छूने दें। पूरी तरह स्नान करने के बाद ही उनको आप छुयें। उनके खिलोनों को डिटर्जेंट के घोल में नित्य धोकर ही उन्हे दें। मशीनरी वाले खिलौनों को आप उठा कर बॉक्स में बंद ही कर दीजिये। वही खिलौने रखिए जो नित्य धोये सुखाये जा सकें। उनके खाने पीने का सामान बाहर से लाना बंद कीजिये। वही वस्तुएं लाइये जो पकाकर दी जा सकें। नूडल पास्ता इत्यादि फूड उनको देने से बचिए। उन्हें समझाना होगा, कैसे समझाना है ये हर माँ अपने स्तर से समझती है कि उसका बच्चा क्या चाहता है। बुजुर्गो को भी उसी तरह डील करना होगा। यद्यपि बहुत से बुजुर्ग बहुत जिद्दी होते है अपने सिवा किसी की नहीं सुनते । अपने मन की करते है उनको भी समझाना होगा कि आपकी जरा सी जिद्द परिवार पर कितनी भारी पड़ सकती है। न सुने तो वहाँ जबरदस्ती से, शिकायत से, मनुहार से जैसे भी बात बने बना लीजिये लेकिन परिवार का नुकसान होने से रोकिए।

अपने आपको नियंत्रण में रखना है, भावनाओं में नहीं बहना है। बिना मतलब यात्राओं से, आउटिंग से, बाहर खाना खाने की आदत से बचना होगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली विभिन्न चीजें जैसे तिल गुड़ का लड्डू, अलसी और गुड़ का लड्डू, मेथी दाना लड्डू, लइया, तिल गुड़ (मुरमुरा) के लड्डू, नमकीन इत्यादि घर पर तैयार करें और उनका सेवन करें। ऑनलाइन पैसे आदान-प्रदान करिए, भुगतान करिए। स्वदेशी चीजों को प्राथमिकता दीजिये। इससे कुटीर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। जो चीजें हमारे अपने भारत देश में ही बनने लगी है उन्हें खरीदिए क्योंकि वे मानकों पर खरी हैं, देश का पैसा देश में ही रहेगा। स्वदेशी बनिए। देश के लिए अपने आपको संभाल कर रखिए। क्योंकि देश तभी है जब आप हैं ! ये युद्ध मिलकर हम जरूर जीतेंगे।

 

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