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40 फीसद लोगों का झुकाव जेनेरिक दवाओं की ओर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। लंबे प्रयास के बाद अब जेनेरिक दवाओं को लेकर आम लोगों की सोच बदल रही है। इसका नतीजा है कि इनके केंद्रों पर बिक्री धीरे-धीरे बढ़ रही है। एक रिसर्च ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि 40 फीसद मरीजों ने ब्रांडेड दवा छोड़कर जेनेरिक दवा लेने लगे हैं।

रिसर्च में हुआ खुलासा

यह खुलासा सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की एक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण यह है कि अब डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन में साल्ट का नाम लिख रहे हैं। साथ ही यह मरीजों को यह आसानी से मिल भी रही है। जेनेरिक दवाओं की बढ़ती पैठ और जन औषधि स्टोर की बढ़ती संख्या से ब्रांडेड दवाओं की कीमत में कमी आने की भी उम्मीद है। मालूम हो कि जेनेरिक दवाएं आम तौर पर ब्रांडेड की तुलना में 50 से 60 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं।

दो साल में हो जायेंगे 25 हजार केंद्र

सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक जन औषधि केंद्रों की संख्या ढाई गुना बढ़ाकर 25,000 करने का है। अभी 753 जिलों में 10 हजार से अधिक केंद्र हैं। इन पर रोज 10 लाख लोग जा रहे हैं। 2023 में यहां से 1236 करोड़ की दवाएं बिकीं। ऐसे में लोगों ने ब्रांडेड दवाएं न खरीदकर अपने 7,416 करोड़ बचाए। घरेलू बाजार में जन औषधि की हिस्सेदारी 4 से 4.5 फीसद तक है। देश में सबसे ज्यादा केंद्र उत्तर प्रदेश (1,481) में हैं। जेनेरिक दवाएं ऐसी दवाएं हैं जो मूल या ब्रांडेड दवाओं के समान सक्रिय तत्वों से बनी होती हैं।

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