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सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर 64 हजार करोड़ का निवेश

एम्स के 48वें दीक्षांत समारोह में पहुंचे उपराष्ट्रपति और स्वास्थ्य मंत्री

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। अपने देश को हमेशा पहले रखें, यह वैकल्पिक नहीं है, यह आवश्यक नहीं है, यही एकमात्र रास्ता है, हम सभी इस देश के ऋणी हैं। यह बात उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और स्वास्थ्य राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल की उपस्थिति में दिल्ली AIIMS के 48वें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत भाषण देते हुए कही।

बेहतर संदेश लेकर जायें

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान से निकलकर स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी दुनिया में कदम रखने वाले विद्यार्थी हमेशा एक संदेश लेकर जाएंगे जो AIIMS के आदर्श वाक्य में परिलक्षित होता है- शरीमाद्यम खलु धर्मसाधनम (एक स्वस्थ शरीर ही हमारे सभी गुणों का वाहक है)। उपराष्ट्रपति ने उन छह सेवानिवृत्त संकाय सदस्यों को अपनी शुभकामनाएं दीं, जिन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है और कहा कि उनका जीवन एवं कार्य आज स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को प्रेरित करेगा।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा का काम करें

डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र बदलाव के कगार पर खड़े हैं, क्योंकि अब आप उन बातों को प्रयोग में ला सकेंगे जिन्हें आपने अपनी शिक्षा के दौरान सीखा है और जहां भी आप जाने का निर्णय लेंगे, याद रखें कि देश इस आशा के साथ आपकी ओर देख रहा है कि आप इस मंच का उपयोग स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए करेंगे।

मेडिकल कॉलेज की संख्या अब दोगुनी

मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कमियों को दूर करने के लिए देश में एक बेहद सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बनाने हेतु भारत के 750 जिलों में 64000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या अब दोगुनी हो गयी है और यूजी-पीजी सीटों की संख्या भी बढ़ चुकी है।

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