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Healthcare पर सरकारी खर्च को लेकर लैंसेट और मंत्रालय में ठनी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत में हेल्थकेयर पर सरकारी खर्च जीडीपी का लगभग 1.2 प्रतिशत है और लोगों की अपनी जेब से लगने वाला खर्च अधिक। हेल्थ मैगजीन लांसेट की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि जरूरतमंद लोगों को हेल्थ सेवाएं देने में सरकार विफल रही है। हालांकि केद्र सरकार ने मुखर रूप से इसे नकारा है।

अपडेट डेटा का भी अभाव

‘भारत में चुनाव: डेटा और पारदर्शिता के मायने’ नामक शीर्षक वाले लेख में लांसेट ने कहा है कि हेल्थकेयर की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में लगातार असमानता अच्छी तरह से पहचानी जाती है। लेकिन भारत के सामने एक बड़ी बाधा स्वास्थ्य डेटा और डेटा पारदर्शिता की कमी से संबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार ताजा और विश्वसनीय डेटा की कमी निर्णय लेने में बाधा बनती है। इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य नीति, योजना और मैनेजमेंट के लिए सटीक और अपडेट डेटा जरूरी है लेकिन भारत में ऐसे डेटा के संग्रह और प्रकाशन में गंभीर रुकावटें हैं।

सटीक काम के लिए डेटा जरूरी

रिपोर्ट में बतौर उदाहरण कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना में देरी हुई। आधिकारिक डेटा के बिना पूरा एक दशक बीत चुका है। लांसेट ने बताया है कि जनगणना हेल्थ सर्वे का भी आधार है। नेशनल सैंपल सर्व संगठन जेब से किए जाने वाले खर्च का समय-समय पर मापन ओवरड्यू है और इसे करने की कोई योजना नहीं है।

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