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हेल्थ क्षेत्र का भारतीय स्टार्टअप GeneAI अब वैश्विक मंच पर

हेल्थ क्षेत्र के भारतीय स्टार्टअप GNI अब वैश्विक मंच पर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। जैसे-जैसे दुनिया वैश्विक महामारियों, तेजी से फैलती बीमारियों और जलवायु परिवर्तन जनित स्वास्थ्य संकटों से जूझ रही है, वैसे-वैसे स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारत, जो अब AI नवाचार में अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा है, अपने स्वास्थ्य स्टार्टअप्स के ज़रिए न केवल घरेलू चुनौतियों का समाधान कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र को भी मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है।
इसी कड़ी में उभर रहा है GeneAI डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, एक भारतीय स्वास्थ्य-तकनीक कंपनी जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और विश्लेषण के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। आने वाले SPIEF-2025 में भारत की भागीदारी के दौरान यह स्टार्टअप वैश्विक मंच पर अपनी विशेषज्ञता साझा करने को तैयार है। GeneAI उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो मल्टीमॉडल मेडिकल इमेजिंग (जैसे MRI और CT स्कैन) के साथ AI का समन्वय कर रही है। इससे बीमारियों की पहले चरण में ही पहचान संभव हो पाती है। कंपनी का दावा है कि इसके द्वारा विकसित मॉडल पारंपरिक तरीकों की तुलना में तेज़, सटीक और अधिक सुलभ हैं।
भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में स्वास्थ्य प्रणाली की चुनौतियाँ अनोखी होती हैं – सीमित संसाधन, विशाल जनसंख्या और असमान स्वास्थ्य पहुंच। GeneAI ऐसे ही माहौल में तैयार हुई तकनीकों के ज़रिए कम लागत, अधिक प्रभाव वाला मॉडल प्रस्तुत कर रही है। यही मॉडल अब वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने के लिए तैयार है।
SPIEF-2025, जो इस वर्ष “साझा मूल्य–बहुध्रुवीय विश्व की नींव” विषय के अंतर्गत आयोजित हो रहा है, वैश्विक आर्थिक सहयोग और नवाचारों को बढ़ावा देने का प्रमुख मंच है। इसमें BRICS देशों के साथ-साथ 90 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।GeneAI जैसी कंपनियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहाँ वे न सिर्फ निवेशकों और नीति-निर्माताओं के सामने अपनी तकनीकों को प्रस्तुत कर सकती हैं, बल्कि अन्य देशों के स्वास्थ्य संगठनों के साथ सहयोग की नई राहें भी खोल सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इन तकनीकों को वैश्विक स्वास्थ्य रणनीतियों में शामिल किया जाए, तो यह भविष्य की महामारियों से निपटने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
GeneAI डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की पहल एक उदाहरण है कि कैसे भारतीय AI स्टार्टअप्स तकनीकी नवाचारों को जीवन रक्षा के साधन में बदल रहे हैं। SPIEF-2025 जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की यह भागीदारी न केवल तकनीकी नेतृत्व का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब समय आ गया है जब भारत से विकसित समाधान, दुनिया के लिए उम्मीद बन सकते हैं।

जानिए टेक्नोलॉजिस्ट निश्छल के बारे में

निश्छल एक भारतीय AI शोधकर्ता और टेक्नोलॉजिस्ट हैं, जो वर्तमान में डिजिटल हेल्थकेयर, विशेष रूप से कैंसर की प्रारंभिक पहचान में AI के अनुप्रयोग पर काम कर रहे हैं। वे GeneAI Digital Healthcare Services Private Limited के संस्थापक हैं, जहां वे मल्टीमॉडल मेडिकल इमेजिंग और मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और सटीक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वे मूल रूप से बिहार से हैं और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से प्राप्त की। बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियों ने उन्हें इस क्षेत्र में तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी का उपयोग करके भारत जैसे देशों में जीवन बचाने की प्रक्रिया को सरल और व्यापक बनाया जा सकता है।
उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व SPIEF (2023), Future Technologies Forum (2023), BRICS Young Scientist Forum (2024), और Eastern Economic Forum (2024) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर किया है। वे स्वास्थ्य, AI, साइबर सुरक्षा, और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के चौराहे पर हो रहे नवाचारों में गहरी रुचि रखते हैं। उनका शोध कार्य अकादमिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, और वे वर्तमान में कंप्यूटर विज्ञान में डॉक्टरेट (PhD) के उम्मीदवार हैं, जहाँ उनका फोकस कैंसर की प्रारंभिक पहचान हेतु मल्टीटास्क लर्निंग और मेडिकल इमेज फ्यूजन पर है।

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