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एंटीबायोटिक हो रही बेअसर, कार्बेपनेम पर लगी रोक

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। एंटीबायोटिक दवा से अंधाधुंध प्रयोग से फार्मा सेक्टर की जेब तो भरी है लेकिन लोगों का शरीर खोखला हुआ है। हालत यह है कि एंटीबायोटिक से ज्यादा ताकतवर हो गये हैं बैक्टीरिया। वे अब संक्रमण से लड़ने में कमजोर साबित हो रहे हैं इसलिए सरकार ने कार्बेपनेम नामक दवा पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब यह दवा बाजार में नहीं बिकेगी।

ICMR का खुलासा

कार्बेपनेम ग्रुप की दवा भारत में निमोनिया और सेप्टीसीमिया (खून में होने वाला संक्रमण) के इलाज के लिए इस्तेमाल हो रही थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक नई स्टडी में सामने आया है कि ये दवा अब बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम नहीं है। चल रही खबरों के मुताबिक शरीर में उपस्थित बैक्टीरिया ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस डेवलप कर लिया है। इसमें रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया, वायरस दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यानी दवाएं उन्हें मार नहीं पाती।

2021 के डाटा से पता चला

प्ब्डत् के मुताबिक जनवरी से दिसंबर, 2021 के बीच संग्रहित डाटा और उनकी स्टडी से ये पता चलता है कि ड्रग रजिस्टेंट पैथोजेन यानी वो बैक्टीरिया जिनको एंटीबायोटिक्स कंट्रोल या खत्म नहीं कर सकते उनकी संख्या बढ़ी है। ऐसी स्थिति में अब उपलब्ध दवाओं के साथ कुछ संक्रमण का इलाज करना मुश्किल हो गया है। चिंता इस बात की है कि अगर जल्द ही कोई नया रास्ता नहीं निकला तो ये पैथोजेन महामारी का रूप भी ले सकते हैं।

इन पर प्रभाव हुआ कम

रिपोर्ट के अनुसार बैक्टीरिया के सेल वाल को नष्ट करने के उपयोग में लाई जाने वाले इमिपेनेम के खिलाफ पैथोजेन की रेजिस्टेंस पावर 2016 में 14 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 36 प्रतिशत हो गया है। सर्जरी के बाद खून, लंग्स या शरीर के अन्य हिस्सों में संक्रमण का कारण बनने वाले स्यूडोमोनास एरुगिनोसा ने भी पिछले कुछ वर्षों में सभी प्रमुख एंटीस्यूडोमोनलब (बैक्टीरिया के खिलाफ असरादार) दवाओं के खिलाफ रेजिस्टेंस हासिल कर लिया है। त्वचा व नाक के भीतरी भाग को प्रभावित करने वाला मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस की भी ड्रग्स रेजिस्टेंस पावर 2016 से 2021 के बीच 28.4 फीसद से बढ़कर 42.6 फीसद तक हो गई है। जोड़ों को प्रभावित करने वाली एन्टेरोकोकस बैक्टीरिया ने तेजी से दवाओं के खिलाफ रेजिस्टेंस हासिल किया है। डायरिया, ई. कोलाई, शिगेला एसपीपी और साल्मोनेला जैसे पैथोजेन पर नॉरफ्लोक्सासिन का प्रभाव भी घट गया है।

 

 

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