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भोजपुरी फिल्म जगत को ‘रसप्रिया’ से सीखने की जरूरत

अब तक आपने ‘रसप्रिया-एगो प्रेम कहानी’ पर क्रिटिक विनोद अनुपम, स्वस्थ भारत के अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह और अन्य दिग्गजों की राय पढ़ी। अब पढ़िए कुछ अन्य एक्सपर्ट की राय…

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। पंचकौड़ी मिरदंगिया, मोहना, उसकी मां…खेत-पथार…पात्रों के इतने छोटे संसार को मात्र एक गीत और चंद संवादों के सहारे स्क्रीन पर उतरी रसप्रिया ने भोजपुरीवुड को बता दिया है कि लोगों की पंसद क्या है। यही तत्व उसे भोंड़ेपन से बाहर निकाल सकता है। मालूम हो कि इसके प्रोड्यूसरों में एक स्वस्थ भारत मीडिया भी है।

6 महीने की तैयारी के बाद बना गीत : अमरेंद्र

इसके नायक अमरेंद्र शर्मा ने एक बातचीत में बताया कि दो साल के प्रयास के बाद इस प्रोजेक्ट ने आकार लिया है। उनका यह दूसरा प्रयास है। इससे पहले ‘बटोही’ आयी थी जिसमें प्रवासी मजदूरों के दर्द को दिखाया गया था। वे बताते हैं कि प्रयास यह रहा है कि इस संक्षिप्त एडोप्टेशन में मूल कथा की आत्मा उतर जाये। जहां तक गीत की बात है, यह संगीत निर्देशक के साथ मिलकर 6 महीने की तैयारी के बाद पूर्ण हो सका।

बड़ कैनवस में समेटल शार्ट फिल्म

नवीन चंद्रकला कुमार लिखती हैं-रेणु जी के लिखल कहानी रसप्रिया प आधारित इ शार्ट फिल्म, बड़ा बड़ कैनवस के अपना में समेटले बिआ। कथ आ भाव त बेजोड बड़ले बा, अमरेंद्र भाई के अभिनय। ओह गजब के। एह शार्ट फिल्म के देखत अमरेंद्र भाई के अभिनय प ध्यान दिहीं। शानदार, राउर अभिनय रीठा हो गइल बा। बेहतरी के गुंजाईस त हरदम रहेला बाकिर राउर अभिनय के ठसक आ स्क्रीन प प्रस्तुति बड़ा अनुभवी आ देखनउक लागत बा। बधाई शानदार डेग खातिर। अस्मिता शर्मा लिखती हैं कि हमारे रेणु जी कहने में जितना गर्व होता है उतना ही गर्व होता है हमारे अमरेंद्र जी कहने में भी, जो न केवल एक अच्छे कलाकार हैं बल्कि अच्छे और बेहद सच्चे इंसान भी हैं। इनकी आवाज़ में ही ये सुंदर गीत है जो भीतर ठहरती है। इस बार हमारी मिट्टी की खुशबू लिए आए हैं।
आप भी इस लिंक पर जाकर इसे देख सकते हैं-

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