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पुराने डॉक्टरों को भी पछाड़ रहा चीन का AI डॉक्टर

पुराने डॉक्टरों को भी पछाड़ रहा चीन का AI डॉक्टर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। AI की मेडिकल साइंस में धमक के बाद दुनिया भर में नए—नए प्रयोग हो रहे हैं। चीन के वैज्ञानिकों ने एक एआई पावर्ड टूल बना लिया है जिसका नाम है DeepRare। इसे गंभीर और जटिल बीमारियों को हल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इंटरनेशनल जर्नल Nature में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि यह एआई पावर्ड टूल रेयर बीमारियों के डायग्नोसिस को तेज और बेहतर बनाने में मदद करता है। इसने कई अनुभवी डॉक्टर को भी पीछे छोड़ दिया है।

AI Doctor: डॉक्टरों से तेज काम

मोना दीक्षित की रिपोर्ट के मुताबिक DeepRare ने लगभग 64.4 फीसद मामलों में अपनी पहली कोशिश में ही बीमारी की सही पहचान कर ली थी। वहीं, पांच अनुभवी डॉक्टरों के लिए सही पहचान करने के मामले 54.6 फीसद थे। कुल मिलाकर यह एआई टूल लगभग 79 फीसद मामलों में सफल रहा जबकि एक्सपर्ट्स सिर्फ 66 फीसद मामलों में सही थे। इससे कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में एआई टूल बीमारियों का पता चलाने और लोगों का इलाज करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाएंगे। स्टडी के मुताबिक रेयर बीमारियां, ऐसी बीमारियां होती हैं जो 2000 में से 1 से भी कम लोगों को होती है, दुनिया भर में 300 मिलियन (30 करोड़) से ज्यादा लोगों पर असर डालती हैं। 7,000 से ज्यादा रेयर बीमारियां हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये बीमारियां लगभग 80 फीसद जेनेटिक होती हैं। इन बीमारियों का आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता है। इनके लक्षण अलग-अलग होते हैं, ये कम फैलती हैं और डॉक्टरों को भी इनके बारे में बहुत जानकारी नहीं होती है। इससे अक्सर मरीजों को सही इलाज के लिए सालों लग जाते हैं।

AI Doctor: कई AI Tool शामिल

DeepRare ऐसी बीमारियों से कुछ यूं निपटेगा। इसके लिए इस एआई टूल के कोर में एक बड़े लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल होता है। इसे एक एजेंटिक फ्रेमवर्क में इंटीग्रेट किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके आर्किटेक्चर में 40 से ज्यादा AI एजेंट और टूल शामिल हैं। ये अलग-अलग काम करते हैं। इनमें नोट्स से लक्षण निकालना, लक्षणों को बीमारियों से मैच करना, मिलते-जुलते मामलों के लिए मेडिकल लिटरेचर खोजना और सीक्वेंसिंग डेटा से जेनेटिक वेरिएंट का एनालिसिस करना शामिल है। यह टूल रैंक किए गए डायग्नोसिस की लिस्ट बनाने के लिए इनपुट को प्रोसेस करता है। खास बात यह है कि मेडिकल सोर्स से वेरिफाइड रेफरेंस के जरिए यह ट्रांसपेरेंट जानकारी देता है। इससे मैनुअल लिटरेचर रिव्यू की जरूरत कम हो जाती है। 6,401 केस पर इस एआई टूल की टेस्टिंग की गई जिसमें DeepRare के नतीजे काफी अच्छे रहे। इसने 15 मौजूदा डायग्नोस्टिक टूल से बेहतर परफॉर्म किया। इसने जेनेटिक डेटा के साथ एक स्टडी ग्रुप में 69 फीसद मरीजों का सही पता लगाया और Exomiser जैसे पॉपुलर टूल से आगे निकल गया। रिसर्चर्स का अंदाजा है कि DeepRare में बीमारी का बहुत पहले ही सही पता लगाने की क्षमता है।

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