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कोविड-19 / COVID-19

कोविड-19 : नशामुक्त भारत?

नशे को लेकर गौतम बुद्ध कहते है कि जिस राज्य में मदिरा आदर प्राप्त करेगी, वह महाकाल के अभिशाप से नष्ट होता चला जायेगा। बुद्ध कहते हैं कि मदिरापान महाहिंसा है।

सुमित कुमार सिंह

कोविड 19 के बारे में ज्यादा बताने कि जरूरत तो नहीं है फिर भी इसके उद्भव की कहानी जानना जरूरी है। वुहान कोरोना वायरस वैश्विक महामारी (2019–20) की शुरुआत एक नए किस्म के कोरोनवायरस के संक्रमण के रूप में मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर में हुई। बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा और यह देखा गया की पीड़ित लोगों में से अधिकतर लोग वुहान सीफ़ूड मार्केट में दो सौ से अधिक जानवरों के मांश सहित मछलियां बेचते हैं तथा जीवित पशुओं का भी व्यापर करते हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बाद में कोरोनावायरस की एक नई नस्ल की पहचान की जिसे 2019-nCoV प्रारंभिक पदनाम दिया गया। इस नए वायरस में कम से कम 70 प्रतिशत वही जीनोम अनुक्रम पाए गए जो सार्स-कोरोनावायरस में पाए जाते हैं। संक्रमण का पता लगाने के लिए एक विशिष्ट नैदानिक पीसीआर परीक्षण के विकास के साथ कई मामलों की पुष्टि उन लोगों में हुई जो सीधे बाजार से जुड़े हुए थे और उन लोगों में भी इस वायरस का पता लगा जो सीधे उस मार्केट से नहीं जुड़े हुए थे। अभी स्पष्ट नहीं है कि यह वायरस सार्स जितनी ही गंभीरता या घातकता का है अथवा नहीं।
कोरोना और नशे का तालमेल?
नशा मनुष्य को नाश की ओर ले जाता है। जिसका नकारात्मक प्रभाव परिवार,समाज और देश पर भी पड़ता है। नशा एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो कि महामारी से भी बड़ा जड़ समाज में फैला चुकी है। इसे रोकने के लिए सरकार के पास ना कोई वैक्सीन है और ना ही दवा। नशा एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो हमें हमारे समाज को, हमारे देश को तेजी से निगल रही है। चाहे शहर हो या गाँव हो आज पढ़ने लिखने की उम्र में लड़के हो या लड़की नशे के आदि हो चुके हैं। इस नशे के कारण लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमतर कर रहे हैं। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को कोरोना से ज्यादा डरने की जरूरत है।
मदिरा पान महाहिंसा है
नशे को लेकर गौतम बुद्ध कहते है कि जिस राज्य में मदिरा आदर प्राप्त करेगी, वह महाकाल के अभिशाप से नष्ट होता चला जायेगा। बुद्ध कहते हैं कि मदिरापान महाहिंसा है। गौतम बुद्ध ने अपने पंचसिल सिद्धान्त में पांचवा और अंतिम सिद्धांत नशामुक्ति को ही लेकर कहा था। महात्मा गांधी कहते हैं कि – अगर मुझे एक घंटे के लिए भी सारे हिंदुस्तान का सर्वशक्ति संपन्न शासक बना दिया जाये,तो पहला काम में जो करूंगा वह यह होगा कि तुरंत तमाम मदिरालयों को बिना कोई मुआवजा दिए बंद करा दूंगा। नेपोलियन कहते हैं- हमें शत्रु की अपेक्षा मदिरा से अधिक डरना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है आगाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को पहले ही बता चुका है कि जो लोग शराब या नशा का सेवन करते हैं उनमें कोरोना होने की आशंका ज्यादा है। क्योंकि कोरोना सीधे फेफड़ों पर अटैक करता है, और नशा करने वाले इंसान के फ़ेफ़डे कमज़ोर हो जाते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 के मन की बात में देशवासियों व ख़ासतौर पर युवाओं को नशे से दूर रहने को कहा था, साथ ही साथ जल्द ही एक हेल्पलाइन नम्बर भी जारी करने को कहा था। लेकिन उन बातों पर सार्थक अमल नहीं हो पाया था पर इस कोरोना ने आज पूरे विश्व में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगा दी है। एक शोध में पता चलता है कि विश्व में 90 प्रतिशत अपराध लोग नशे में ही करते हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हम नशा छोड़े और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें। कोरोना से लड़ना है तो नशा को अलविदा कहना पड़ेगा।
 
(लेखक काशियाना फाउंडेशन के संस्थापक है)
 

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