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मूक-बधिरों की पीड़ा समझ सकेंगे इस अस्पताल के डॉक्टर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भोपाल के जेपी अस्पताल में ऐसी व्यवस्था की गई है कि मूक बधिर भी डॉक्टरों से संवाद कर सकेंगे। यह देश में पहली बार हो रहा है। इसके लिए एक्सपर्ट इंटरप्रेटर की व्यवस्था की गई है जो मरीज के क्यूआर कोड स्केन करते ही उपलब्ध होंगे। ये एक्सपर्ट मरीजों को पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को समस्या बताने तक में मदद करेंगे। इसके लिए डेफ केन फाउंडेशन के साथ एमओयू भी किया गया है।

क्यूआर कोड स्कैन करना होगा

मालूम हो कि फाउंडेशन की फाउंडर प्रीति सोनी खुद मूक बधिर हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने साइन लेंग्वेज के जरिए अपने साथ मौजूद इंटरप्रेटर की मदद से बात की। उन्होंने बताया कि जैसे ही कोई मूक बधिर अस्पताल पहुंचेगा, वैसे ही उसे क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। इसके तत्काल बाद एक साइन लेंगवेज एक्सपर्ट वीडियो कॉल पर उन्हें मुहैया हो जाएगा जो उनकी बात समझकर अस्पताल के कर्मचारी, डॉक्टर, नर्स व अन्य लोगों को बताएगा। इसी प्रकार उनकी बातें मूक बधिर मरीज को समझाएगा। इससे मुक बधिर भी सामान्य लोगों की तरह इलाज करा सकेंगे।

हर तरफ क्यूआर कोड की व्यवस्था

साइन लैंग्वेज के एक्सपर्ट आसानी से उपलब्ध हो सकें, इसके लिए अस्पताल में पांच जगह क्यूआर कोड लगाए गए हैं। इसमें हेल्प डेस्क, इएनटी, मेडिसिन, नेत्र, दंत विभाग की ओपीडी और सिविल सर्जन कक्ष भी शामिल हैं। इन्हें किसी तरह की समस्या आने पर हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मचारियों को भी बेसिक ट्रेनिंग दी जानी है। यह पायलट प्रोजेक्ट रहा सफल तो हर अस्पताल में लागू होगा।

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