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विज्ञान की सबसे उन्नत प्रयोगशाला बनेगा भारत

108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आगाज
देश में महिलाएं और विज्ञान प्रगति के पथ पर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस (ICC) को संबोधित किया। इस वर्ष का मुख्य विषय ‘महिला सशक्तिकरण के साथ सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें भारत को आधुनिक विज्ञान की सबसे उन्नत प्रयोगशाला बनाना है।

डेटा और टेक्नालॉजी में हम समृद्ध

उन्होंने कहा कि जब विज्ञान में जुनून के साथ राष्ट्रीय सेवा की भावना का संचार होता है, तो परिणाम अभूतपूर्व होते हैं। मुझे यकीन है, भारत का वैज्ञानिक समुदाय हमारे देश के लिए एक ऐसी जगह सुनिश्चित करेगा, जिसके वह हमेशा से हकदार रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के पास दो चीजें बहुतायत में हैं। पहली-डेटा और दूसरी टेक्नोलॉजी। इन दोनों में भारत की साइंस को नई बुलंदियों पर पहुंचाने की ताकत है। भारत के प्रयास के परिणाम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से वर्ल्ड के टॉप कंट्रीज में शामिल हो रहा है। 2015 तक हम 130 देशों की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 81वें नंबर पर थे। लेकिन 2022 में हम 40वें नंबर पर पहुंच गए हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम की संख्या के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में हम शामिल है।

विज्ञान में महिलाओं का रोल बढ़े

विज्ञान कांग्रेस की थीम के बारे में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पीएम ने दोनों क्षेत्रों के बीच पूरकता पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सोच सिर्फ यह नहीं है कि हमें विज्ञान के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना चाहिए बल्कि महिलाओं के योगदान से विज्ञान को भी सशक्त बनाना चाहिए।

लैब से लैंड तक जाना होगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइंस के प्रयास, बड़ी उपलब्धियों में तभी बदल सकते हैं-जब वे लैब से निकलकर लैंड तक पहुंचे, जब उसका प्रभाव ग्लोबल से लेकर ग्रास रूट तक हो, जब उसका विस्तार जर्नल्स से लेकर जमीन तक हो, जब उससे बदलाव रिसर्च से होते हुए रियल लाइफ में दिखने लगे। उन्होंने कहा कि जब विज्ञान की उपलब्धियां लोगों के अनुभवों से प्रयोगों के बीच की दूरी को पूरा करती हैं तो यह एक महत्वपूर्ण संदेश देती हैं और युवा पीढ़ी को प्रभावित करती हैं जो विज्ञान की भूमिका के प्रति आश्वस्त हो जाती हैं। ऐसे युवाओं की मदद के लिए उन्होंने एक संस्थागत ढांचे की जरूरत पर जोर दिया।

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