नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत की दवा आपूर्ति श्रृंखला की गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अनुसूची एच2 के दायरे का विस्तार करने और QR Code आधारित ट्रैक और ट्रेस ढांचे के तहत दवाओं की अतिरिक्त श्रेणियों को लाने के लिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत मादक औषधि एवं मनोरोग पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत आने वाले सभी टीके, रोगाणुरोधी, मादक और मनोरोग औषधियां तथा सभी कैंसर रोधी दवाओं को औषधि नियम, 1945 की अनुसूची एच2 में शामिल किया गया है।
क्यूआर कोड: प्रामाणिकता जरूरी
इस संशोधन के अनुसार इन दवाइयों के निर्माताओं को उत्पाद के प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर या अपर्याप्त स्थान होने पर द्वितीयक पैकेजिंग लेबल पर बार कोड या त्वरित प्रतिक्रिया (QR Code) कोड मुद्रित करना या चिपकाना अनिवार्य होगा। क्यूआर कोड में ऐसी जानकारी संग्रहित होगी जिसे सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के माध्यम से उत्पाद के प्रमाणीकरण और सत्यापन को सुगम बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है। क्यूआर कोड में उत्पाद की प्रमुख जानकारी शामिल होगी, जिसमें विशिष्ट उत्पाद पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, निर्माता का नाम और पता, बैच संख्या, निर्माण और समाप्ति तिथियां, निर्माण लाइसेंस संख्या और जहां लागू हो, सहायक पदार्थों का विवरण शामिल होगा। क्यूआर कोड आधारित पहचान की आवश्यकता पहले देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों पर लागू थी। वर्तमान संशोधन इसके दायरे को काफी हद तक बढ़ाता है और इसमें सभी टीके, रोगाणुरोधी दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं और मादक एवं मनोरोगी दवाएं शामिल करता है, जिससे पता लगाने की क्षमता का दायरा बढ़ता है और नकली एवं घटिया दवाओं के प्रसार के खिलाफ सुरक्षा उपाय मजबूत होते हैं।
क्यूआर कोड: जुलाई से प्रभावी
उत्पादों का उन्नत पहचान ढांचा आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों में दवाओं के प्रमाणीकरण को सुगम बनाएगा और दवा उत्पादों की बेहतर ट्रैकिंग और सत्यापन को सक्षम करेगा। इस उपाय से नियामक निगरानी को मजबूत करने और बाजार में नकली दवाओं के वितरण को रोकने के प्रयासों को सहायता मिलने की उम्मीद है। यह नकली और घटिया जीवाणुरोधी उत्पादों की बेहतर पहचान और निगरानी को सक्षम बनाकर जीवाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के खिलाफ राष्ट्रीय लड़ाई में भी योगदान देगा। उद्योग और अन्य हितधारकों को कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त समय देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने अनुपालन के लिए चरणबद्ध समयसीमा निर्धारित की है। टीकों, मादक और मनोरोगी दवाओं तथा कैंसर रोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई 2027 से लागू होंगे, जबकि रोगाणुरोधी दवाओं से संबंधित प्रावधान 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होंगे। इससे एनडीपीएस ड्रग्स की आपूर्ति श्रृंखला पर नज़र रखने और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने में भी मदद मिलेगी, जिससे देश के “नशा मुक्त भारत” अभियान में योगदान मिलेगा।
