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रोग / Disease

डायबिटीज से आजादी दिला देगी विजयसार की लकड़ी

benifit of vijaysar wood

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। डायबिटीज…खराब लाइफस्टाइल के चलते डायबिटीज की समस्या आम हो गई है। पहले तो डायबिटीज 50 साल से ज्यादा उम्र के लागों को होती थी, लेकिन जेनेटिक होने के कारण अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। समय रहते इसे कंट्रोल कर लिया जाए, तो इसके बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।
वैसे तो डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए लोग लौकी, गिलोय जैसे घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। मधुमेह और घुटनों के दर्द का रामबाण इलाज है विजयसार नाम की एक लकड़ी। ये मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत में पाया जाता है। इसकी लकड़ी के टुकड़े हर जड़ी बूटी बेचने वाले या पंसारी की दुकान से आसानी से मिल जाते हैं। इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल से गहरे लाल रंग का होता है। यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए कई कम्पनियां और कई क्षेत्रों में इसके ग्लास भी बनाकर बेचते हैं। पर वो बहुत महँगे पड़ते हैं और कुछ देर बाद उस ग्लास की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। मधुमेह, प्रमेह (धातु रोग), अस्थियों की मजबूती के लिए भी यह जाना जाता है। इससे किसी भी तरह का साइड-एफेक्ट भी नहीं होता।

विजयसार के औषधीय गुण

1. मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
2. उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
3.‌ अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
4. जोडों के दर्द में लाभ देता है। विजयसार घुटनों के दर्द का रामबाण इलाज है।
5. हाथ-पैरों के कंपन में भी बहुत लाभदायक है।
6. शरीर में बढ़ी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
7. त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-बार होने वाली फोड़े-फुंसी में भी लाभ देता है।
8. प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
9. इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़-कड़ बंद होती है। अस्थियाँ मजबूत होती है।

विजयसार सेवन के तरीके

विजयसार की लकड़ी के वैसे टुकड़े बाजार से ले आएं जिसमें घुन न लगा हो। इसे सूखे कपड़े से साफ कर लें। अगर टुकड़े बड़े हैं तो उन्हें तोड़ कर छोटे-छोटे टुकड़े बना लें। फिर आप एक मिट्टी का बर्तन लें और इसके छोटे—छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दें। सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी लें और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दें। शाम को इस पानी को उबाल कर छान लें। फिर इसे ठंडा होने पर पी लें।
इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते हैं। अगर आप अंग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे हैं तो एकदम न बंद करें। बस धीरे-धीरे कम करते जाएं। अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते हैं तो एक सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दें। हर सप्ताह इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दें। विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं।
-मिट्टी का बर्तन तो ही लें, अगर मिट्टी अच्छी तरह से पकी हुई हो और उसे अच्छी तरह साफ करके ही प्रयोग करें। वर्ना आप शीशे या चीनी मिट्टी का बर्तन भी प्रयोग में ला सकते हैं।
-मधुमेह के रोगी को जेब में कुछ टाफियां या मीठे बिस्कुट हमेशा रखने चाहिए। यदि चक्कर आए तो एक-दो टॉफी या बिस्कुट तत्काल खा लें।

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