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कई अंगों के दान से अमर हो गयी विनीता खजांची

पहली बार दोनों हाथों का भी हुआ दान
अजय वर्मा

नयी दिल्ली। अंगदान-देहदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ी है। ऐसे मामलों को मीडिया भी तवज्जो देने लगा है। लेकिन इस बार इंदौर की विनीता खजांची के परिजन तो दानवीर कर्ण निकले। कमाल की बात यह कि मरणोपरांत उनका हाथ भी दान हुआ ताकि 18 साल की एक जन्मजात हाथविहीन लड़की अपने हाथों से कुछ कर पाने में समर्थ हो सके।

उम्र 52 साल,  ब्रेन डेड के बाद हुआ सब कुछ

दरअसल 52 साल की विनीता खजांची को अचानक मस्तिष्क संबंधी गंभीर समस्या के चलते एक निजी अस्पताल में 13 जनवरी की सुबह भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनकी हालत बिगड़ती चली गई। चिकित्सकों ने उन्हें 15 जनवरी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उनके परिजनों ने 16 जनवरी को सबकी सहमति के बाद अंगदान का फैसला लिया। वहां के अफसरों ने बताया कि मृत शरीर से उनके दोनों हाथ, दोनों फेफड़े, लिवर, त्वचा, आंखें और किडनी एकत्र कर लिए गये।

पहली बार किया गया हाथ का दान

इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सचिव डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि यह राज्य के इतिहास में पहली बार है, जब दिमागी रूप से मृत किसी व्यक्ति के हाथों का अंगदान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अंगदान के क्षेत्र में एक क्रांति की तरह है। दोनों हाथों को विशेष उड़ान से मुंबई भेजा गया जहां एक निजी अस्पताल में प्रत्यारोपण के जरिये इनको 18 वर्षीय युवती के शरीर में लगाया जाएगा। उसे जन्म से ही हाथ नहीं थे।

कुछ अंग चेन्नई भी भेजे गये

अंगदान को बढ़ावा देने वाली गैर सरकारी संस्था ‘मुस्कान ग्रुप’ के संदीपन आर्य ने बताया कि दोनों फेफड़े विशेष उड़ान से चेन्नई भेजे गए जहां जरूरतमंद मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित किए जाएंगे। यकृत और दो किडनी इंदौर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों के शरीर का हिस्सा बनकर उन्हें नयी जिंदगी देंगे। इस महिला की त्वचा और आंखें भी दान की गई हैं।

पारिवारिक परंपरा रही अंगदान की

पता चल रहा है कि यह परिवार लगातार अंगदान के लिए लोगों को प्रेरित करता रहा है। जून 2022 में विनीता के ससुर की आंख और त्वचा का दान हुआ था। उसके दो साल पहले उनके बड़ी भाभी शिरोमणि खजांची के बॉम्बे हॉस्पिटल से ही अंगदान हुए थे। करीब 20 दिन पूर्व ही उनके संबंधी संतोषी लाल जैन की आंख और त्वचा का दान किया गया।

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