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जनऔषधि योजना भारी संकट में !

जनऔषधि योजना भारी संकट में, केंद्रों पर दवाइयों का गहराया संकट

पिछले 3 महीने से दवाइयों की नहीं हुई है खरीद

जेनेरिक दवा निर्माता एवं जनऔषधि संचालक हुए नाराज

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रधानमंत्री का सपना रहा है कि लोगों को सस्ते दर पर दवा और दूसरे उपचार संबंधी सामान मिले। इसके लिए उन्होंने जनऔषधि केंद्रों को बढ़ावा दिया। लेकिन अब हालत ऐसी हो गई है कि जेनरिक दवा निर्माता से लेकर जनौ​षधि केंद्र चलाने वाले भी परेशान हैं। इन केंद्रों पर दवा का स्टॉक भी खत्म होने जा रहा है।

जनऔषधि: नयी पॉलिसी से बात बिगड़ी

विवाद तब शुरू हुआ जब शहरी क्षेत्र में जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए जीरो डिस्टेंटिंग पॉलिसी लागू की गई यानी आसपास में कई केंद्र खोले जा सकते हैं। यह ऐसा फैसला है जिससे जनऔषधि केंद्र आने वाले मरीज कई दुकानों में बंट जाएंगे जिससे उनकी बिक्री प्रभावित होगी। इसके खिलाफ संचालकों ने आवाज उठायी लेकिन अब तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है।

जनऔषधि:  केंद्रों पर दवा का संकट गहराएगा

सूत्र बताते हैं कि बात इतनी ही नहीं है। मार्च 2025 तक हुई दवाइयों की आपूर्ति का भुगतान दवा निर्माताओं को नहीं मिला है। इससे उनमें भी नाराजगी है। जुलाई 2025 से दवा की खरीद नहीं हुई है। जनऔषधि केंद्रों पर अधिकतम 1 महीने का स्टॉक बच गया है। इससे तो दवा का संकट गहराएगा और कमजोर वर्ग के मरीजों को महंगी दवा पर निर्भर होना पड़ेगा। इस बाबत दवा निर्माताओं ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। वे अपने बकाया भुगतान और पीओ जारी करने की मांग कर रहे हैं ताकि सप्लाई चेन को सही किया जा सकें।

‘स्वस्थ भारत’ ने पीएम से हस्तक्षेप की मांग की

‘स्वस्थ भारत’ ने भी उनकी मांगों से सहमति जताते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि संचालक से दवा निर्माताओं तक की परेशानी दूर हो और बाजार में दवा की उपलब्धता बनी रहे। इस बाबत स्वस्थ भारत ने सीइओ, जनऔषधि को दोनों मामलों पर एक पत्र भी लिखा है। जिसका जवाब अभी तक नहीं आया है।

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