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फार्मासिस्ट को मिले प्रिस्क्रिप्सन का अधिकार : विवेक मौर्य

जबलपुर :

सभा में मौजूद फार्मासिस्ट
सभा में मौजूद फार्मासिस्ट

फार्मासिस्टों ने अंग्रेजी दवा लिखने के अधिकार को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। इस बार आवाज आई है मध्य प्रदेश से।  प्रिस्क्रिप्सन लिखने की मांग को लेकर विगत दिनों प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने जबलपुर में आयोजित संवाद-बैठक में आंदोलन करने की चेतावनी दी। हालांकि सरकार यह मान रही है कि प्रदेश में डॉक्टरों की काफी कमी है। इस बात को लेकर हाल में ही शासन ने आयुष चिकित्सकों को पीएचसी में तैनात करने की बात कही थी। वही दूसरी तरफ फार्मासिस्टों को सरकार का फैसला नागवार ग़ुजरा है। इस बावत प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विवेक मौर्य ने बताया कि हाल में ही फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन (पीपीआर 2015) का गज़ट नोटिफिकेशन किया है। जिसके तहत दवा सम्बन्धी परामर्श मसलन खुराक समेत अन्य जानकारी मरीज़ को देनी है। इसके लिए फार्मासिस्ट परामर्श शुल्क ले सकते हैं। उत्तराखंड सरकार ने पंद्रह दिनों तक डॉक्टर की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट को प्रिस्क्रिप्सन लिखने की मंजूरी दी है। विवेक कहते हैं कि जो फार्मासिस्ट पंद्रह दिन तक डॉक्टर की अनुपस्थिति में दवा लिख सकता है तो वही डॉक्टर की मौजूदगी में क्यों नहीं लिख सकता ? यहाँ मध्य प्रदेश में दूर दराज़ अस्पतालों में डॉक्टर की काफी कमी है। विवेक मौर्य ने अपनी मांग रखते हुए स्वस्थ भारत डॉट इन को बताया कि  पीएचसी / सीएचसी में फार्मासिस्टों को प्रिस्क्रिप्सन लिखने का अधिकार दिया जाए ताकि मरीजों को सुलभता से दवा देने के साथ-साथ इलाज़ किया जा सके । मध्य प्रदेश के कई अस्पतालों में आज भी एमबीबीएस डॉक्टर नदारद रहते हैं। वहां फार्मासिस्ट ही मरीज़ों का इलाज़ करते हैं।
गौरतलब है कि इस तरह की मांग देश के सभी राज्यों के फार्मासिस्ट कर रहे हैं।
 
 

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