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नयी बीमारी : मंकी पॉक्स से कई देशों में संक्रमण से भय

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। दुनिया  के कई हिस्सों में फैल रही मंकी पॉक्स नामक बीमारी ने एक बार फिर सरकारों से लेकर आमलोगों तक को चिंता में डाल दिया है। भारत में अब विदेश से आने वालों पर विभिन्न एयर पोर्ट पर नजर रखने की सूचना भी आ रही है।

कोरोना के बाद फिर डर

हालांकि भारत में अब तक इससे संक्रमण की कोई खर नहीं है। खबरों के मुताबिक इस नए वायरस ने ब्रिटेन से लेकर अमेरिका जैसे देशों में भी कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। यह मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबन्धीय वर्षावन क्षेत्रों का रोग है लेकिन धीरे-धीरे इसने और भी कई देशों में पैर पसारना शुरू कर दिया है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि उसकी ओर से ऐसे 6 लोगों की निगरानी की जा रही है जिन्हें मंकी पॉक्स का संक्रमण होने की आशंका जताई जा रही है। इन सभी लोगों ने मंकी पॉक्स से पीड़ित एक व्यक्ति के साथ फ्लाइट में सफर किया था। इसी महीने की शुरुआत में ये लोग नाइजीरिया से ब्रिटेन गए थे।

कुछ हफ्तों के लिए हल्का बुखार

जानकारी के मुताबिक मंकी पॉक्स एक ऐसे वायरस के कारण होती है जो स्मॉल पॉक्स ऑर्थोपॉक्स वायरस के परिवार से संबंधित है जिसमें वैरियोला वायरस भी शामिल है। वैरियोला वायरस से स्मॉल पॉक्स या छोटी चेचक बीमारी होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक मंकीपॉक्स में ऐसे लक्षण होते हैं जो चेचक के समान होते हैं लेकिन कम गंभीर होते हैं। स्मॉलपॉक्स या चेचक को टीके के जरिए दुनिया भर से 1980 में खत्म कर दिया गया था। इसमें मरीज को बहुत हल्का बुखार आता है और अधिकतर लोग कुछ ही हफ्तों में ठीक भी हो जाते हैं। मंकीपॉक्स ज्यादातर जंगली जानवरों जैसे चूहे, गिलहरी आदि और बंदर से फैलता है। इंसान से इंसान में यह घाव, पसीना, सांस और बिस्तर के संपर्क से भी फैलता है। रोगी को बुखार, त्वचा पर दाने, तेज सिरदर्द, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, अचानक काफी कमजोरी, कंपकंपी आदि लक्षण नजर आते हैं। आमतौर पर 5 से 21 दिनों के बीच लक्षण उभरते हैं। इसके बाद आमतौर पर चेहरे पर दाने दिखाई देते हैं जिसमें तरल पदार्थ आने लगते हैं जो पपड़ी में बदल जाते हैं। यह बीमारी संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने से भी फैलती है।

50 साल पहले मिला था संक्रमण

जानकारी के मुताबिक एक शोध के लिए रखे गए बंदरों में चेचक जैसी दो तरह की बीमारी नजर आई जिसमें एक का नाम मंकीपॉक्स रख दिया गया। बात 1958 की है। इससे संक्रमण का पहला मामला 1970 में सामने आया था। 1970 के बाद अफ्रीका के 11 देशों में इसके मरीजों की पुष्टि की गई थी अमेरिका में 2003 में इसका मामला सामने आया था। 2018 में यह बीमारी इजराइल और ब्रिटेन देश में भी पहुंच ही गई थी।

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