स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के विरुद्ध मिलकर काम करेंगे भारत-हॉलैंड

नयी दिल्ली। भारत और हॉलैंड के बीच द्विपक्षीय साझेदारी के अंतर्गत भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित- सेंटर फॉर सेल्युलर ऐंड मॉलेक्यूलर प्लेटफॉर्म्स (C-CAMP) और नीदरलैंड्स के संस्थान NADP (नीदरलैंड्स एंटीबायोटिक डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स) तथा एएमआर ग्लोबल के बीच एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance) की चुनौती से निपटने के लिए साझा प्रयास करने पर सहमति बनी है।

वन हेल्थ से सबका उपचार संभव

इस संयुक्त कार्यक्रम के अंतर्गत एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के विरुद्ध ‘वन हेल्थ’ के दृष्टिकोण से जल, कृषि, पशु और मानव स्वास्थ्य के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों के विकास और सह-निर्माण के लिए संयुक्त प्रयास किये जाएंगे। वन हेल्थ एक समेकित अवधारणा है, जो मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, मिट्टी, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र जैसे विभिन्न विषयों के ज्ञान को कई स्तरों पर साझा करने के विचार पर आधारित है, जो सभी प्रजातियों के स्वास्थ्य में सुधार, रक्षा और बचाव के लिए आवश्यक है।

WHO ने भी माना बड़ा खतरा

एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का उपयोग मनुष्य, पशुओं और वनस्पतियों को संक्रमण से बचाने और संक्रमित हो जाने की दशा में उसके उपचार में किया जाता है। समय के साथ विषाणु, रोगाणु, कवक और परजीवियों में परिवर्तन आ जाता है। ऐसे में उनपर प्रचलित एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का असर होना बंद हो जाता है। इस स्थिति को ‘एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध’ कहा जाता है। इस स्थिति में संक्रमण का उपचार और उसका प्रसार रोकना एक कठिन चुनौती बन जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए शीर्ष दस खतरों में चिह्नित किया है। C-CAMP के सीईओ और निदेशक डॉ. तस्लीमारीफ सैयद कहते हैं -एक आम समस्या का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग देश के लोगों के एकसाथ काम करने की यह पहल वन हेल्थ दृष्टिकोण के प्रति भारत और नीदरलैंड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इंडिया साइंस वायर से साभार

Related posts

NHA ने जारी किया आभा ऐप का संशोधित संस्करण

admin

गणतंत्र दिवस परेड में बुलाया गया योग शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी

admin

तपेदिक पीड़ितों और इससे मौत की संख्या में आयी कमी

admin

Leave a Comment